गौ सेवा से भयंकर चर्म रोग से मुक्ति मिल शक्ति है ?

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

क्या गौ सेवा से भयंकर चर्म रोग से मुक्ति मिल शक्ति है ?


क्या गौ सेवा से भयंकर चर्म रोग से मुक्ति मिल शक्ति है ?


हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि गौ माता में छत्रिस कोटि देवी - देवताओं का वास होता है गौ माता के दर्शन मात्र से हमारे सभी पाप अक्षय पुण्य में बदल जाते हैं। 

तो गौ सेवा से हर काम संभवित बन भी जाता है ।

ये बात सत्य मेरा अनुभव के आधारित है कि में 2012 के साल से रामेश्वरम में रहने के लिये आये थे ।

तब मेरा बगल में ही मेरा एक पड़ोसी  अन्ना वो एक ही मेरा पास बैठ उठ शुरू किया था क्योंकि में यहां के लोकल तामिल  भाषा बोल भी नही शकता ओर समझ भी नही शकता तब ये अन्ना तो गुजरात रिलाइंस कंपनी में नोकरी करके इधर आये थे तो उसको गुजराती भाषा और हिंदी भाषा पर अच्छा प्रभुत्व था तो मेरा उसका साथ अच्छा दोस्ती भी बन गया था । 






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इस मे उसका शरीर पर सेहुआ जैसा चकते निकलना शुरू हुआ था । 

उसका इलाज वही बेबरू ( बांदा ) के साधारण डॉक्टरों से करवाया । 

डॉक्टरों ने इंजेक्शन टेबलेट ओर मलम लगाने का दिया । 

लेकिन उसमे थोड़ाक दिन हुवा तो फिर से रोग डबल उभराया ओर लाल चकते पूरा शरीर मे हो गए फिर इस अन्ना ने यहां के सरकारी हॉस्पिटल में बांदा के ऐलोपैथिक डॉक्टरको दिखाया और उनका एक तक का इलाज को कहा लेकिन जैसा जैसा इस अन्ना ने डॉक्टर का कोर्स तो शुरू कर दिया था..!

लेकिन कुछ दिन तक दवाया से थोड़ाक दिन राहत भी दिखाया पर फिर से रोग उभर कर तीन गुना बठकर सामने दिखाई देने लगता था ।








तो मैने उसको कहा कि अन्ना मेरा बात मान लो में आपका रोग सही कर दूंगा तो उसने मुझे कहा कि तुम परदेशी हो तो मैने कहा कि अन्ना में परदेशी था तब था अब तो में इधर ही पूरा सेटिंग तो हो गया...! 

लेकिन अभी तक मेरा दिमांग में तमिल भाषा बोलने को मालूम ही नही पड़ता तो में क्या करूँ जब मुझे भगवान तमिल भाषा बुलायेगा तब में बहुत अच्छी तरह से तमिल बोल दूंगा ।

बाद मेने उसको कहा कि अन्ना आपका दिमांग में मेरा बात न उत्तर रही हो या आपको मेरा बातो में ज्यादा रस ही न हो तो आपका पास मुझे बोलने का कोई अर्थ ही नही रहता । 

बाद उसने थोड़ाक दिन रामनाथपुरम में बड़ी हॉस्पिटल में दवाया लिये । 

लेकिन दवाया से ज्यादा से ज्यादा लाल लाल चकता पूरा शरीर में नजर समक्ष दिखाई देने लगा तो इसने मदुराई में ईसाइयों की बड़ी खानगी हॉस्पिटल में दवाया लेने शुरू किया लेकिन उधर भी एक ही हुवा फोटु पड़वा लो इंजेक्शन लो टेबलेट लो उसका भी कोर्स खत्म न हुवा तो इसका पूरा शरीर पर खुजली आना भी शुरू हो गया ओर पूरा शरीर मे छिलके जैसा उतरने लगता था । 

डॉक्टरों ने इसको सोरायसिस बताया था ।

बाद उसने मुझे कहा कि प्रभु भगवान ने तो मेरा लिये कोई दवाया बनाया ही नही है । 

अब तो इतना खुजली आते रहते है कि मानो के अभी इस मे प्राण निकल जायेगा । 

में खुजली कर कर के दवाया इंजेक्शन खा खा कर बहुत परेशान हो गया कि क्या में कोई किसी भी दवाया की बोतल मुह पर लगा कर आत्महत्या कर लूं इतना क्रोध आ रहा है  के उसका कोई सीमा ही नही होता।

तब मैंने कहा कि अन्ना में परदेशी भले रहा लेकिन क्या आपको अच्छा करना है कि नही करना बोलो तो उसने कहा कि क्या करूँ प्रभु में तो इसमें बहुत परेशान हो चुका हूं । 
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तो मैने कहा कि आप किसी प्रकार की चिंता न करे सब चिंता मुझे दे दो में आपको जितना कहु इतना ही आप मेरा बात परध्यान दो आपका रोग बिल्कुल नही रहेगा । 

तो उसने कहा ठीक है बात करे में क्या करूँ तो मैने कहा आप इतना समय से हॉस्पिटलों में चक्कर काट रहे है में आपको कितना समय से कहता था आपने मेरे बात पर पहले से ध्यान दिया होता तो आज कब से अच्छा हो गया होता । 

तो उसने कहा अब तो बात कर प्रभु अब तो में तेरा बात सुनता हूं मानता हूं । 

तो मैने कहा कि आप घर पर पूछ लो के प्रभु ने कहा कि गाय लेना है । 

गाय का पालन पोषण सेवा चाकरी सब करना है । 

तो उसने कहा कि में घर पर तेरा अम्मा को मेरा बेटा को उसकी बहुओं को पूछ कर तुझे बात करता हु तो मैने कहा ठीक है । 

में मना नही बोलता में किसी का घर मे कलेस नही करवा शकता तो तब अन्ना हसने लगा ।

तो मैने कहा कि इतना पैसा आप हॉस्पिटलो में डाल दिया उतने में कितना गाय या जाते पूरा गौ शाला बन जाता लेकिन में तो परदेशी हु इस लिये मेरा बात सुनेगा ही कौन तो एना हसने लगा था ।

बाद एना बोला कि मैने घर मे पूछ लिया गाय लेने को घर मे हा बोला है । 

तो मैने कहा कि देशी वेला ( नस्ल ) की गाय लेना है जिसका पीठ पर कुंद्ध हो ऐसा किसी भो कलर किसी भी रंग का हो लेकिन बछेली सहित हो या अकेली गाय लो वो आपका मर्जी ।

बाद अन्ना के बड़ा बेटा शीलवर्स ने आठ ही दिन मे गाय लेकर आ गया तब मैंने कहा कि अन्ना जितना बने इतना ओर जितना हो शके इतना आप जो गाय के गोबर उठाने का काम गौ मूत्र साफ करने का काम और गाय को खाना देने का काम करे तो अच्छा रहेगा । 
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आप गाय का सेवा करे में आपका लिये लक्ष्मीनारायण ओर सेतुमाधव में अभिषेक पूजन अर्चना का काम कर दूंगा तो अन्ना कहा ठीक है ।

बाद मेने कहा कि रोज सुबह एक तरह उधर में लक्ष्मीनारायण ओर सेतुमाधव में अभिषेक पूजन करूँगा आप देशी गुड़ ( साकर ) को घी और मधु ( हन्नी  ) के साथ मिलाकर आपका  शरीर पर जहां छिलका उत्तर रहा है वहा लेप कर दो । 

बाद आप गाय माता के मुह के पास खड़ा रह जाये गाय माता पूरा गुड़ ( साकर )  धी मधु ( हन्नी ) वाले उसका मुह से चाट जाएगी । 

आपका पूरा वो शरीर का भाग साफ कर देगी । 

एक तरह रोज सुबह देठ घँटे तक मे लक्ष्मीनारायण सेतुमाधव का अभिषेक पूजन करू उतना समय तक अन्ना गाय माता को ( शकर) गुड़, मधु ( हन्नी ) ओर घी को उसका शरीर का खुजली वाले भाग पर लेप लगाकर खिलाते रहे । 

बाद जैसा एक मास के ऊपर जैसा समय हुवा तो खुजली आना भी बंध हो गया तब मैंने कहा कि अन्ना अभी आप अब फिर मदुराई हॉस्पिटल जाए किसी भी हॉस्पिटल में किसी भी चर्म रोग का डॉक्टर को दिखाए वो क्या बोल रहा है । 

वो आप बाद में मुझे कहना तो अन्ना कहा ठीक है ।

तो एना ने कहा कि डॉक्टर भी मुझे पूछने लगा कि ये कैसे हुवा ये रोग तो मिटना शक्य ही नही था और आपको तो रोग अब सिर्फ आधा से भी ज्यादा अच्छा हो गया इतना अच्छा कैसे हुवा है ।

लेकिन गाय को घी , गुड़ ( सकर ) मधु ( हन्नी )  को खिलाने से गाय के सेवा करने से पूरा नया चमडी भी आने का शुरू हो गया था । 

तीन महीने ऊपर तक का समय तक ऐसा रोज रोज सुबह गाय को खिलाने से पूरा शरीर का चर्म रोग से मुक्त हो गया । 

बाद एना ओर उसका बेटा बहुओं कहा कि प्रभु बाद उस अन्ना का बहुओं ओर पौता मुझे  हिंदी मामा के नाम से पुकारना ही शुरू कर दिया था । 

अब हम जीवन भर गौ सेवा करते रहेंगे हम अब कभी गौ सेवा छोड़ने वाले नही है । 

आज भी उसका घर पर गाय माता है और अन्ना ही गाय का पूरा सेवा कर रहा है...!
 
इस लिये गौ को माता का दर्जा मिल रहा है कि गाय सब की माता होती है । 

गाय की सेवा में सब दुख दर्द जल्दी मुक्त हो जाते है । 

हमारे हिन्दू धर्म मे गाय माता की सेवा श्री कृष्ण ने किया श्री कृष्ण का ही रूप सेतुमाधव है । 

और भगवान श्री कृष्ण ही विष्णुजी और लक्ष्मीनारायण  है ।

भगवान विष्णु या लक्ष्मीनारायण ओर श्री कृष्ण दोनों ही सभी सुखों को देने वाले माने गए हैं। 

अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करते हैं । 

गौ माता की सेवा और उनके नित्य दर्शन से हमारा मन शांत रहता है और सभी कार्य सफल होते हैं।

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भक्ति ज्ञान से श्रेष्ठ है :

भक्ति मन की चेतन और अवचेतन दोनों  ही स्थितियों में जागृत हो जाती है....!

जबकि ज्ञान केवल चेतन मन की अवस्था में ही उत्पन्न होता है...! 

ज्ञान आँखों की तरह है गुण अवगुण दोनों को देखता है...! 

तर्क करता है कई बार अच्छी बातों में विवादी हो जाता है....! 

जब कि भक्ति नेत्र विहिन भाव प्रधान होती है...! 

जो सिर्फ महसूस करती है...! 

और सब को अंगीकार कर ईश्वर के योग्य करती।

भक्ति से ईश्वर को पाना आसान है...!

पर ज्ञान से जानने के बाद ईश्वर को पाना और कठिन है....!

क्योंकि ज्ञान उत्सुकता लाता है...! 

जबकि भक्ति एक में स्थिर कर देती है...! 

स्थित - प्रज्ञ अवस्था में ला देती।

भक्ति जन्म दात्री है ज्ञान की।

ज्ञान स्वार्थी बना देता है...! 

भक्ति निस्वार्थ कर देती है। 
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र क्या है ?

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोप...