।। श्री अथर्वेद के अनुसार नवग्रहों के वृक्ष और जड़े धारण करने से मिलने वाले फल ।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। श्री अथर्वेद के अनुसार नवग्रहों के वृक्ष और जड़े धारण करने से मिलने वाले फल ।।

नवग्रहों के वृक्ष और जड़ों को धारण करने का वैदिक ज्योतिषीय रहस्य !

श्रीअथर्वेद के अनुसार नवग्रहों के वृक्ष  मतलब पौधा और जड़े धारण करने की सम्पूर्ण विधि ।

भारतीय परंपरा में वृक्ष केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं माने गए, बल्कि उन्हें देवत्व, ग्रह - ऊर्जा, औषधीय गुण और आध्यात्मिक साधना से भी जोड़ा गया है। 

वैदिक ज्योतिष, नक्षत्र - विचार, प्रश्नकुंडली, गोचर - विचार, अंकशास्त्र, हस्तरेखा तथा सामुद्रिक परंपराओं में मनुष्य और प्रकृति के बीच एक सूक्ष्म संबंध की कल्पना की गई है। 

इसी परंपरा में कुछ वृक्षों की जड़ को विशेष ग्रहों से संबंधित मानकर विधिपूर्वक धारण करने की प्रथा भी मिलती है।

प्राचीन काल से नवग्रह की अनुकूलता के लिये रत्न पहनने का प्रचलन रहा है।

सम्पन्न लोग महंगे से महंगे रत्न धारण कर लेते है। 


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यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझना आवश्यक है कि अलग - अलग ज्योतिषीय ग्रंथों, क्षेत्रीय परंपराओं और आचार्यों में ग्रहों से संबंधित वृक्ष और जड़ों की सूची अलग हो सकती है। 

इस लिए नीचे दिया गया विवरण परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं और लोकाचार के रूप में समझना चाहिए, आधुनिक विज्ञान द्वारा सिद्ध चिकित्सा या निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं।

लेकिन इन रत्नों का संबंध ग्रह के शुभाशुभ प्रभावको बढ़ाने केकारण इनकी माँग और भी ज्यादा बढ़ गई है।

परन्तु सभी व्यक्ति इतने सक्षम नहीं होते कि वे ग्रह के आधिकारिक महंगे रत्न पहन सकें।

हमारे शास्त्रों में ऋषि मुनियों ने प्राचीन कालसे में ही ग्रह राशियों के आधिकारिक वृक्ष उनके गुण देखकर निर्धारित किये थे।

प्रारम्भ में सभी लोगों को महंगे रत्न उपलब्ध नहीं होते थे। 

तब वे पेड़ की जड़धारण करते थे। 

आज भी कुछ मूर्धन्य सज्जन वृक्ष की जड़ को रत्नों की जगह अपनाते है। 

रत्नों की तरह ही पेड़ की जड़ भी पूर्ण लाभ देती है। 

वृक्ष की जड़ पहनने के लिए सर्वप्रथम आपको अपने जन्मनाम की राशि का पता होना चाहिए।

और अपनीराशि के स्वामी ग्रह का भी ज्ञान होना चाहिए।
 





नीचे दिया हुवा सारणी में आपको ग्रह और राशि के साथ आधिकारिक वृक्ष की जड़ का विवरण दिया जा रहा है।


     राशि ----ग्रह ---- वृक्ष

     मेष ------- मंगल---खदिर

     वृष---------शुक्र ---- गूलर

     मिथुन------बुध-----अपामार्ग

     कर्क -------चंद्र -----पलाश

     सिंह--------सूर्य -----आक

     कन्या-------बुध ----अपामार्ग

     तुला--------शुक्र ----गूलर

     वृश्चिक------मंगल---खदिर

     धनु--------- गुरु ----पीपल

     मकर--------शनि---शमी

     कुम्भ--------शनि ---शमी

     मीन --------गुरु -- -पीपल



पेड़ से जड़ लेने की प्रक्रिया : -

आपको जिस ग्रह या नक्षत्र से संबंधित पेड़ की जड़ लेनी हो ।

उस ग्रह या नक्षत्र के आधिकारिक दिन से एक दिन पहले 

अर्थात : -

मेष या वृश्चिक राशि हो तो उसके स्वामी मंगल की जड़ पहनने के लिए मंगलवार से एक दिन पहले सोमवार को ।








वृष या तुला राशि हो तो उसके स्वामी शुक्र की जड़ पहनने के लिए शुक्रवार से एक दिन पहले गुरुवार को ।

यदि मिथुन या कन्या राशि हो तो उसके स्वामी बुध की जड़ पहनने के लिए बुधवार से एक दिन पहले मंगलवार को ।

यदि कर्क राशि हो तो उसके स्वामी चन्द्रमा की जड़ पहनने के लिए सोमवार से एक दिन पहले रविवार को ।

यदि सिंह राशि हो तो उसके स्वामी सूर्य की जड़ पहनने के लिए रविवार से एक दिन पहले शनिवार को ।

यदि धनु - मीन राशि हो तो  स्वामी गुरु की जड़ पहनने के लिए गुरुवार से एक दिन पहले बुधवार को ।

यदि मकर - कुम्भ राशि हो तो  उसके स्वामी शनि की जड़ पहनने के लिए शनिवार से एक दिन पहले शुक्रवार को ।
        
शुभ मुहूर्त देखकर उस वृक्ष के पास जाएँ और वृक्ष से निवेदन करें कि....!

मैं आपके आधकारिक ग्रह की शांति और शुभ फल प्राप्ति हेतु ।

आपकी जड़ धारण करना चाहता हूँ ।

जिसे कल शुभ मुहूर्त में आपसे लेने आऊंगा। 

इसके लिए मुझे अनुमति प्रदान करें। 

इसके बाद अगले दिन उस ग्रह के वार को धूपबत्ती , जल का लोटा , पुष्प , प्रसाद आदि सामग्री लेकर शुभ मुहूर्त में उस वृक्ष के पास जाएँ और हाथ जोड़कर जल चढ़ाएं। 

फिर धूपबत्ती जलाकर पुष्प चढ़ाएं।  

उसके बाद प्रसाद का भोग लगाएं। 

फिर प्रणाम करके उसकी जड़ खोदकर निकाल लें। 

और घर ले आएं।
  
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Metal type
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Size
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Item type name
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Country of Origin
India }








{ About this item

  • NATURAL PYRITE WEALTH BRACELET: Crafted with certified natural Pyrite beads, known as the stone of wealth and success, believed to attract financial growth, prosperity, and positive money energy in daily life.
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🌞 सूर्य और वृक्ष की जड़ :


सूर्य को आत्मबल, पिता, प्रतिष्ठा, शासन, नेतृत्व, तेज और जीवनशक्ति का कारक माना जाता है। 

पारंपरिक ग्रह - वृक्ष संबंधों में सूर्य के लिए आक ( मदार ) अथवा कुछ परंपराओं में बेल का संबंध बताया जाता है।

यदि जन्मकुंडली में सूर्य कमजोर हो, लग्नेश के साथ शुभ संबंध हो लेकिन फल देने में बाधा आ रही हो, अथवा गोचर में सूर्य से संबंधित आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा के विषय सामने आ रहे हों, तो परंपरागत उपायों में सूर्य की उपासना, सूर्य को अर्घ्य, आदित्य मंत्र और संबंधित वृक्ष की सेवा को महत्व दिया जाता है।

जड़ धारण करने की परंपरा में इसे रविवार, शुक्ल पक्ष और सूर्य के अनुकूल मुहूर्त में शुद्ध करके धारण करने की बात कही जाती है। 

किंतु केवल सूर्य कमजोर है इसलिए हर व्यक्ति को जड़ धारण कर लेनी चाहिए— ऐसा नियम नहीं है। 
कुंडली में सूर्य की स्थिति, भाव, राशि, नक्षत्र और दशा का विचार पहले किया जाना चाहिए।

🌙 चंद्रमा और वृक्ष :


चंद्रमा मन, माता, भावनाएँ, स्मृति, कल्पना, यात्रा, जल और मानसिक शांति का प्रतिनिधि माना जाता है। 

चंद्रमा के साथ पलाश अथवा कुछ परंपराओं में अन्य शीतल प्रकृति वाले वृक्षों का संबंध जोड़ा जाता है।

चंद्रमा पीड़ित होने की स्थिति में सोमवार को शिव - उपासना, जलाभिषेक, माता का सम्मान, सफेद वस्तुओं का दान और चंद्र मंत्र का जाप पारंपरिक उपाय माने जाते हैं।

जड़ धारण करने से पहले प्रश्नकुंडली या जन्मकुंडली में चंद्रमा का वास्तविक बल देखना आवश्यक माना जाता है। 

केवल मन अशांत होने को ग्रहदोष मानकर कोई भी जड़ पहनना उचित नहीं।

🔴 मंगल और वृक्ष की जड़ :


मंगल साहस, भूमि, भाई, पराक्रम, अग्नि, शारीरिक शक्ति और संघर्ष का कारक माना जाता है। 

मंगल के लिए खैर वृक्ष का संबंध कई पारंपरिक ज्योतिषीय मतों में मिलता है।

कुंडली में मंगल शुभ होकर कमजोर हो तो परंपरागत रूप से हनुमानजी की उपासना, मंगलवार का व्रत, रक्तदान जैसे सामाजिक सेवा कार्य तथा वृक्षारोपण को मंगल से संबंधित सकारात्मक कर्म माना जा सकता है।

मंगल की जड़ धारण करने की बात हो तो मंगलवार, मंगल के अनुकूल नक्षत्र तथा कुंडली में मंगल की स्थिति पर विचार करना चाहिए। 

विशेषकर यदि मंगल पहले से ही अत्यधिक प्रबल और उग्र हो, तो बिना ज्योतिषीय परीक्षण के मंगल संबंधी वस्तु धारण करना उचित नहीं माना जाता।


🌿 बुध और हरे वृक्ष :


बुध बुद्धि, वाणी, गणना, व्यापार, लेखन, शिक्षा, तर्क, संचार और कौशल का कारक माना जाता है। 

बुध से संबंधित परंपराओं में अपामार्ग जैसे पौधों का उल्लेख मिलता है।

बुध कमजोर होने पर बुधवार को गणेश उपासना, विद्यार्थियों की सहायता, हरी वस्तुओं का दान, मधुर वाणी और ज्ञान का सदुपयोग करने को श्रेष्ठ माना जाता है।

अंकशास्त्र में भी बुध का संबंध सामान्यतः अंक 5 से जोड़ा जाता है। 

इस लिए यदि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि, भाग्यांक और कुंडली में बुध के संकेत एक - दूसरे को पुष्ट करते हों, तो ज्योतिषी बुध से संबंधित साधना का सुझाव दे सकता है।

🟡 गुरु और पवित्र वृक्ष :


बृहस्पति ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, विवाह, धन, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। 

गुरु के साथ पीपल अथवा कुछ परंपराओं में अन्य पवित्र वृक्षों का संबंध स्थापित किया जाता है।

गुरु की कृपा के लिए गुरुवार को गुरु, देवता और आचार्य का सम्मान, पीले पदार्थों का दान, ज्ञान का प्रसार तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता अत्यंत सुंदर पारंपरिक उपाय हैं।

गुरु की जड़ धारण करने की अपेक्षा कई परंपराएँ गुरु से जुड़े वृक्ष की सेवा और उसके संरक्षण को अधिक श्रेष्ठ कर्म मानती हैं। 

वृक्ष की जड़ निकालकर प्रकृति को नुकसान पहुँचाना किसी भी आध्यात्मिक दृष्टि से आदर्श उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

💎 शुक्र और सुगंधित वनस्पतियाँ :


शुक्र सौंदर्य, प्रेम, विवाह, कला, संगीत, भौतिक सुख, वाहन, आभूषण और आकर्षण का कारक माना जाता है। 

शुक्र से जुड़े पारंपरिक वनस्पति संबंधों में उदुम्बर आदि का उल्लेख विभिन्न परंपराओं में मिलता है।

शुक्र कमजोर होने पर शुक्रवार को लक्ष्मी - उपासना, स्त्री का सम्मान, सुगंधित वस्तुओं का दान, स्वच्छता और कला का सदुपयोग शुभ माना जाता है।

शुक्र की जड़ धारण करने से पहले यह देखना चाहिए कि शुक्र कुंडली में शुभ है या अशुभ, किस भाव का स्वामी है, किस नक्षत्र में है और वर्तमान दशा-गोचर क्या संकेत दे रहे हैं।

⚫ शनि और वृक्ष :


शनि कर्म, श्रम, अनुशासन, विलंब, न्याय, सेवा, भूमि, निर्धन वर्ग और जीवन के कठिन अनुभवों का कारक माना जाता है। 

शनि से शमी वृक्ष का संबंध भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यंत प्रसिद्ध है।

शनिवार को शमी वृक्ष का पूजन, श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों की सहायता, ईमानदार कर्म, अनुशासन तथा अहंकार का त्याग शनि से संबंधित श्रेष्ठ आध्यात्मिक उपाय माने जा सकते हैं।

शनि की जड़ धारण करने के बजाय शमी का पौधा लगाना और उसकी रक्षा करना प्रकृति तथा धर्म—दोनों दृष्टियों से अधिक सकारात्मक उपाय हो सकता है।

☊ राहु और वनस्पति परंपरा :


राहु को छाया ग्रह माना जाता है। 

आधुनिक जीवन में भ्रम, अचानक परिवर्तन, विदेशी संबंध, तकनीक, असामान्य परिस्थितियाँ और मानसिक उलझन जैसे विषयों को ज्योतिषीय व्याख्या में राहु से जोड़ा जाता है।

राहु के लिए विभिन्न परंपराओं में अलग - अलग वनस्पतियों का उल्लेख मिलता है। 

इस लिए राहु की जड़ के विषय में किसी एक सूची को सार्वभौमिक नियम मानना उचित नहीं।

राहु के उपायों में गलत संगति छोड़ना, नशे और छल - कपट से दूर रहना, जरूरतमंदों की सहायता करना तथा मन को अनुशासित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

☋ केतु और आध्यात्मिक वृक्ष :


केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता, रहस्य, तपस्या, पूर्व संस्कार और अंतर्मुखी चेतना का कारक माना जाता है। 

केतु से संबंधित वनस्पति और जड़ की परंपराएँ भी अलग - अलग क्षेत्रों में अलग मिलती हैं।

केतु के लिए गणेशजी की उपासना, ध्यान, सेवा, अहंकार का त्याग और आध्यात्मिक अध्ययन को विशेष महत्व दिया जाता है।

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⭐ नक्षत्र-पद्धति से वृक्ष का संबंध :


नक्षत्र ज्योतिष की परंपरा में प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता, प्रतीक, शक्ति और वनस्पति संबंध माना जाता है। 

इस लिए केवल राशि देखकर वृक्ष चुनना अधूरा हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान उपलब्ध हों तो जन्म नक्षत्र, नक्षत्र स्वामी, लग्न, चंद्र राशि और वर्तमान दशा - गोचर का अध्ययन करके संबंधित वृक्ष की सेवा या पौधारोपण को अधिक व्यक्तिगत बनाया जा सकता है।

यही विचार कृष्णमूर्ति पद्धति के दृष्टिकोण से भी रोचक बन जाता है। 

KP पद्धति में ग्रह के नक्षत्र स्वामी और उप - स्वामी को अत्यंत महत्व दिया जाता है। 

इस लिए किसी ग्रह का केवल राशि में होना पर्याप्त नहीं; वह किन भावों का संकेतक बन रहा है, इसका विचार भी आवश्यक है।


✋ हस्तरेखा और सामुद्रिक संकेत :


हस्तरेखा में सूर्य पर्वत, चंद्र पर्वत, मंगल क्षेत्र, बुध पर्वत, गुरु पर्वत, शुक्र पर्वत और शनि क्षेत्र को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है। 

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में किसी ग्रह से संबंधित रेखाएँ कमजोर दिखाई दें, तो पारंपरिक हस्तरेखा - विचार में उसी ग्रह के गुणों को विकसित करने की सलाह दी जा सकती है।

लेकिन हस्तरेखा और जन्मकुंडली को एक - दूसरे का पूर्ण विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। 

दोनों प्रणालियाँ अलग परंपराओं पर आधारित हैं।

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🏠 वास्तु में वृक्ष का महत्व :


वास्तुशास्त्र में वृक्षों का स्थान भी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

घर में वृक्ष लगाते समय दिशा, भवन की संरचना, प्रकाश, हवा, जड़ों के फैलाव और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

धार्मिक विश्वास के कारण ऐसा वृक्ष घर में नहीं लगाना चाहिए जिसकी जड़ें भवन की नींव को नुकसान पहुँचाएँ। 

वास्तु का उद्देश्य प्रकृति और निवास के बीच संतुलन स्थापित करना होना चाहिए। 

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🔢 अंकशास्त्र और ग्रह :


अंकशास्त्र में सामान्यतः सूर्य को 1, चंद्रमा को 2, गुरु को 3, राहु को 4, बुध को 5, शुक्र को 6, केतु को 7, शनि को 8 और मंगल को 9 से जोड़ा जाता है।

इस दृष्टि से जन्मांक और भाग्यांक देखकर किसी ग्रह की प्रधानता का पारंपरिक अनुमान लगाया जाता है। 

लेकिन अंकशास्त्र और कुंडली दोनों के निष्कर्ष अलग हो सकते हैं। 

इस लिए केवल अंक देखकर जड़ धारण करना उचित नहीं।







🌳 सबसे बड़ा उपाय— वृक्ष की जड़ नहीं, वृक्ष की सेवा :


इन सभी परंपराओं का सबसे सुंदर संदेश यह है कि ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए प्रकृति का सम्मान किया जाए।

यदि सूर्य कमजोर माना जाए तो सूर्य को अर्घ्य दें और वृक्ष लगाएँ।

चंद्रमा के लिए जल की रक्षा करें।

मंगल के लिए साहस के साथ सेवा करें।

बुध के लिए शिक्षा और ज्ञान बाँटें।

गुरु के लिए किसी विद्यार्थी की सहायता करें।

शुक्र के लिए सुंदरता और कला का सम्मान करें।

शनि के लिए श्रमिक और गरीब व्यक्ति की सहायता करें।

राहु के लिए भ्रम और छल से दूर रहें।

केतु के लिए ध्यान, सेवा और आध्यात्मिक चिंतन करें।

इस प्रकार ग्रह-उपाय केवल धातु, रत्न या जड़ पहनने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवनशैली का सुधार बन जाता है।
 
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जड़ धारण करने की विधि : -

जड़ को घर लाकर शुभ मुहूर्त में भगवान के सामने आसन पर बैठ कर उसे पंचामृत और गंगाजल से धोकर धूपबत्ती दिखाकर उसके आधिकारिक ग्रह के मंत्र का यथा सामर्थ्य अधिक से अधिक या कम से कम एक माला का जाप करें।  

फिर उसे गले में पहनना हो तो ताबीज़ में डाल ले और हाथ पर बांधना हो तो कपड़े में सिलकर पुरुष दाएं हाथ में और स्त्री बाएं हाथ में बांध ले। 

धारण करते समय निम्न मंत्र बोले   : -

सूर्य ----- ॐ घृणि: सूर्याय नमः 

चन्द्रमा -ॐ चं चन्द्रमसे नमः 

मंगल - ॐ भौम भौमाय नमः 

बुध ----ॐ बुं बुधाय नमः 

गुरु ----ॐ गुं गुरुवे नमः 

शुक्र ---ॐ शुं शुक्राय नमः 

शनि ---ॐ शं शनये नमः  

🙏 जड़ धारण करने के पारंपरिक नियम :


परंपरागत मान्यता के अनुसार जड़ धारण करने से पहले जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, दशा, गोचर, ग्रहबल, नक्षत्र और भावों का विचार करना चाहिए। 

जड़ प्राकृतिक और सही पहचान वाली होनी चाहिए। उसे किसी जीवित वृक्ष को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुँचाकर निकालना उचित नहीं।

धारण करने से पहले उसे स्वच्छ जल से शुद्ध करना, संबंधित ग्रह के मंत्र का जाप करना और ईश्वर से सद्बुद्धि की प्रार्थना करना पारंपरिक विधि मानी जाती है।

यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी, त्वचा संबंधी समस्या या अन्य शारीरिक परेशानी हो सकती हो तो जड़ को त्वचा से बाँधने के बजाय केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में पूजा करना बेहतर है।

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🌸 संदेश :


वैदिक परंपरा में नवग्रह केवल आकाश में दिखाई देने वाले ग्रहों के रूप में नहीं, बल्कि मानव जीवन के विभिन्न गुणों के प्रतीक के रूप में भी देखे गए हैं। 

वृक्ष पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश—

पंचमहाभूतों के साथ मनुष्य को जोड़ते हैं। 

इस लिए ग्रह और वृक्ष का संबंध एक गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में समझा जा सकता है।

भृगु संहिता, गर्ग परंपरा, पुराणों, ज्योतिषीय ग्रंथों, नक्षत्र - विचार, हस्तरेखा और वास्तु परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव अलग - अलग रूपों में दिखाई देता है; 

लेकिन किसी विशेष जड़ को पहनने से निश्चित धन, विवाह, संतान, स्वास्थ्य या सफलता मिलेगी—

ऐसा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं है।

अतः सर्वोत्तम उपाय है—

कुंडली का विचार करें, योग्य परंपरागत विद्वान से सलाह लें, वृक्षों की रक्षा करें, पौधे लगाएँ, सत्कर्म करें और अपने कर्म को ग्रह-उपाय से भी अधिक महत्वपूर्ण समझें।

“वृक्ष की जड़ धारण करने से पहले वृक्ष का सम्मान करना सीखिए; क्योंकि प्रकृति की सेवा ही ग्रह - शांति की सबसे सुंदर साधना है।” 🌳🙏🏻🌸

!!!!! शुभमस्तु !!!
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।। सॉफ्टवेयर कुंडली मिलान और ज्योतिष ।।

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।। सॉफ्टवेयर कुंडली मिलान और ज्योतिष  ।।


सॉफ्टवेयर कुंडली मिलान और ज्योतिष 


★★सॉफ्टवेयर से ही कुंडली मिलान करने बाद बोल रहा है कि ज्योतिष शास्त्र गलत है ।

आज कल के लोग अपने बच्चों की शादी के लिए कुंडली मिलान करने हेतु किसी साफ्टवेयर की सहायता से कुंडली का मिलान कर लेते हैं ।

बाद लोग बोल रहे है कि ज्योतिष गलत है ज्योतिष गलत कहा है गलत तो हम होते है कि हम बिना महेनत या बिना अनुभवी की किसी प्रकार की सलाह लिया बिना काम कर रहे होते है ।




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जब पता चलता है कि मिलान में 20, 22, 25, 28, 30, 34 गुण मिल रहे है, तो शादी कर देते हैं ।

लेकिन जब शादी के बाद जीवन अच्छा नहीं चलता तो पंडित, आचार्य, पुरोहित को दोष या कुंडली मिलान उनकी नज़र में फालतू की चीज़ होता है ।









वैसे लोगों को मेरी सलाह होगा कि कभी भी गुण परजा कर शादी मत कीजिए ।

किसी जानकार ज्योतिषी से मिलकर दोनों बच्चों जिनकी शादी करने जा रहे हैं ।

उनके ग्रहों के मैत्री को दिखलाइये  उनकी आयु, रोजगार, रोग, संतान सुख, पारिवारिक सुख विचार कैसा रहेगा ।

अगर ये सारी चीज मिल रही हैं और गुण कम भी मिल रहा है तो शादी कीजिए। 

याद रखिए कोई कम जानकर है ओर किसी कुंडली को देख कर बोले एकाधिपत्य कुंडली है दोनों के राशिष एक ही ग्रह हैं ।

इस लिए इन बातों में बिल्कुल न पड़े क्योंकि अगर दोनों की राशि एक हो तो गोचर में कोई भी ग्रह जब किसी भी भाव को पीड़ित करेंगें ।

तो उसका असर दोनों पर समान रूप से प्रभावी होगा जो काफी बुरा होगा। 










उसी तरह दोनों के राशि एक होने से संभव है कि दशा भी एक ही हो अगर दशा भी समान होगा और बुरा हो तो जीना मुश्किल हो सकता है ।

इस लिए किसी जानकार ज्योतिषी का सहारा ले। 

ज्योतिषाचार्य पं. प्रभु राज्यगुरु ने बताया कि इसी कड़ी में एक बात कहना चाहता हूँ कि बहुत लोग मंगली दोष मानते हैं ।

तो बोलते हैं कि मांगलिक कि शादी मांगलिक से ही करना चाहिए लेकिन ये पाया जाता है ।

कि जो लोग मांगलिक है और उनकी शादी बिना मांगलिक बच्चों से की जाती है ।

फिर भी उनके जीवन में कोई परेशानी नहीं है ।

क्यों की उसका कारण है ग्रहों की मैत्री.!!

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जय श्री राम अयोध्या धाम⛳

7 जून 2025 से मंगल केतु की जो युति गोचर में बन रही है वह कैसी होगी इसका विश्लेषण सभी राशियों के लिए जानने के लिए सर्वप्रथम कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि सभी राशियों और सभी जातकों के लिए इस ग्रह युति का फल अलग-अलग होगा 

कुछ लोगों के लिए अच्छा और कुछ लोगों के लिए बुरा होगा कुछ लोगों के लिए बहुत अच्छा तो कुछ लोगों के लिए बहुत बुरा भी हो सकता है 

सामान्य तौर पर मंगल केतु की युति को अच्छा नहीं माना जाता है....! 

लेकिन फिर भी आपकी कुंडली के अनुसार आपकी राशि के अनुसार आपकी लगन के अनुसार यह कैसा फल देगा या जानने के लिए....! 

सर्व प्रथम आप अपनी कुंडली में निम्न बातों पर ध्यान दीजिए कि....!

आपकी कुंडली में सिंह राशि में बनने वाले मंगल केतु युति से आपके ऊपर उसका क्या असर होगा....! 

क्योंकि यह युक्ति सिंह राशि में बन रही है इस लिए आपको अपनी कुंडली में या भी देखना है....! 

कि आपकी कुंडली में सिंह राशि किस भाव में बैठा है और आपकी कुंडली के अनुसार सिंह राशि आपके लिए अच्छी राशि है अथवा बुरी राशि है 

इस के अतिरिक्त आपको अपनी कुंडली में मंगल की स्थिति को जानना है कि आपकी कुंडली में मंगल शुभ है अथवा अशुभ है....! 

कारक है अथवा कारक है किन ग्रहों के साथ मंगल है और मंगल की स्थिति के बाद अपनी कुंडली में 

केतु की स्थिति का आकलन करें कि आपकी कुंडली में केतु की क्या स्थिति है.....! 

आपकी कुंडली के लिए केतु कैसा है क्या आपकी कुंडली में केतु राज योग कारक है अथवा अशुभ फल देने वाला है 

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है इसलिए आपको अपनी कुंडली में सूर्य की स्थिति का भी आकलन कर लेना चाहिए कि आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह कैसा है शुभ है अथवा अशुभ है....!

इस के अतिरिक्त आपको अपनी कुंडली में वर्तमान समय में चल रही महादशा और अंतर्दशा का भी ध्यान रखना है...! 

कि वर्तमान समय में आपकी कुंडली में किस ग्रह की महादशा और अंतर्दशा चल रही है....! 

यदि किसी बहुत अच्छे ग्रह की वहां दशा चल रही है तब ऐसी दशा में यह ग्रह गोचर मंगल केतु की युति आपके लिए बहुत ज्यादा अशुभ नहीं होगा अथवा...!

यदि आपकी कुंडली में बहुत अच्छे ग्रह की महादशा चल रही है और आपकी कुंडली में सूर्य मंगल केतु अच्छे हैं....! 

तब ऐसी स्थिति में आपके लिए यह मंगल केतु की युति का परिणाम अत्यंत शुभ और अच्छा हो सकता है....! 

आपके लिए लाभदायक हो सकता है शुभ हो सकता है बहुत अच्छा परिणाम दे सकता है इसके साथ-साथ आपको अपनी...!

लगन कुंडली और चंद्र राशि पर भी ध्यान देना है कि आपकी चंद्र राशि क्या है और लग्न राशि क्या है यदि आपकी कुंडली में चंद्र राशि और लग्न राशि दोनों से मंगल सूर्य कर्क एवं शुभ ग्रह हैं.....! 

तब ऐसी स्थिति में मंगल केतु की युति से बनने वाला सिंह राशि में या संयोग अच्छा होगा और यदि...! 

आपकी लग्न राशि और चंद्र राशि दोनों से सूर्य और मंगल कारक नहीं है अशुभ हैं....! 

तब ऐसी स्थिति में यह मंगल केतु की युति सिंह राशि में जो बन रही है आपके लिए अशुभ हो सकता है कोई घटना घट सकती है

जैसे कि मान ले कि आपका लग्न मेष है और मेष राशि में ही चंद्रमा बैठा है तो ऐसी स्थिति में आपकी लग्न राशि और चंद्र राशि मेष ही होगी और ऐसी स्थिति में मेष राशि के लिए मंगल शुभ होता है अच्छा होता है....! 

कारक ग्रह होता है और सूर्य भी शुभ और कारक ग्रह होता है तब आपकी कुंडली में बनने वाला मंगल केतु योग अच्छे परिणाम देगा लेकिन इसमें भी वही शर्ट आ जाती है कि क्या आपकी कुंडली में जन्म कुंडली में सूर्य और मंगल अच्छे भाव में है....! 

क्या उनकी स्थिति अच्छी है अगर उनकी स्थिति अच्छी है अच्छे भाव में है तब ही या योग अच्छे परिणाम दे सकता है फिर भी इस बात की भी सावधानी रखनी चाहिए कि क्या आपकी कुंडली में केतु की स्थिति अच्छी है क्या केतु आपकी कुंडली में अच्छे भाव या शुभ स्थिति में है केतु की स्थिति का भी आकलन कर लेना चाहिए

और यदि मान ले कि आपकी लगन में से है और आपकी चंद्र राशि  कन्या है तब ऐसी स्थिति में मेष के लिए और और मंगल कर्क एवं शुभ ग्रह है लेकिन कन्या के लिए मंगल और सूर्य अशुभ होते हैं तब आप अपनी कुंडली में इस ग्रह गोचर का क्या फल निकलेंगे या एक जटिल प्रश्न हो जाता है और इसके लिए ज्योतिषी को अच्छे से कुंडली का विश्लेषण करके ही आकलन किया जा सकता है क्योंकि यहां पर सूर्य मंगल कर्क भी नहीं है और या भी देखना है कि क्या कुंडली में सूर्य और मंगल खराब स्थिति में तो नहीं है यदि या ग्रह और भी ज्यादा कुंडली में खराब प्रभाव दे रहे हैं तब ऐसी स्थिति में इस ग्रह युति का परिणाम खराब भी हो सकता है और यदि समान स्थिति में है तब लगन और चंद्र राशि के अनुसार एक अच्छा और एक बुरा कुल मिलाकर सामान्य फल हो सकता है

अब मान  ले की आपकी राशि और लगन दोनों ऐसे हैं कि दोनों से सूर्य और मंगल कारक ग्रह नहीं है शुभ नहीं है जैसे कन्या ही राशि को ले ले तो कन्या के लिए सूर्य और मंगल दोनों ही अशुभ होते हैं इसलिए ऐसी स्थिति में कन्या लग्न भी है और कन्या राशि भी है तब आपके लिए यह मंगल केतु की युति अशुभ परिणाम दे सकता है और यदि सूर्य मंगल बहुत ही खराब स्थिति में है तब ऐसी स्थिति में बहुत ही खराब परिणाम दे सकता है

कुल मिलाकर यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार जानना चाहते हैं कि आपके लिए 7 जून से 28 जुलाई तक बनने वाले मंगल केतु युति का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा आपके लिए शुभ होगा अशुभ होगा अथवा सामान्य रहेगा कैसा फल देगा इसके लिए आपको अपनी संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण करवाना पड़ेगा और इस विश्लेषण के बाद ही आप या तय कर सकते हैं कि आपका वर्तमान समय 7 जून से 28 जुलाई के बीच कैसा रहेगा इसके लिए कुंडली में निम्न बातों का विश्लेषण आवश्यक है

आपकी कुंडली में वर्तमान महादशा अंतर्दशा क्या है और जिस ग्रह की महादशा अंतर्दशा चल रही है वह ग्रह आपकी कुंडली में कारक है शुभ है अथवा अशुभ है अथवा और किस भाव में बैठा है किन ग्रहों के साथ है उसकी स्थिति क्या है उसे महादशा अंतर्दशा का फल सर्वप्रथम जान समझ ले इसके बाद आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति क्या है क्योंकि यह सिंह राशि में बन रहा है इसलिए सूर्य की स्थिति का आकलन कर लें कि आपकी कुंडली में सूर्य आपकी लगन और राशि से कैसा है मंगल की स्थिति का आकलन करने की मंगल अच्छा है अथवा खराब है इसके बाद आप अपनी कुंडली में केतु से बनने वाले योग को देख लें कि क्या आपकी कुंडली में केतु अशुभ तो नहीं है इन सब को जानने के बाद ही आप अपनी कुंडली के अनुसार जान सकते हैं कि आपका समय कैसा रहेगा


अब यहां सभी राशि और लगन के लिए मैं इस मंगल केतु युति का परिणाम प्रस्तुत करने जा रहा हूं और मैं आपको पहले से ही सचेत कर दे रहा हूं कि इस परिणाम को आप पूरी तरह से खुद पर लागू न समझे क्योंकि मैंने पहले ही बता दिया है कि सर्वप्रथम आपको अपनी कुंडली का संपूर्ण विश्लेषण करवा लेना चाहिए और इस तथ्य का पता लगा लेना चाहिए कि आपकी कुंडली में इस मंगल केतु यति का परिणाम किस राशि किस भाव में बन रहा है और उसे भाव के मजबूती का भी पता लगा लीजिए कि आपकी जन्म कुंडली में क्या हुआ भाव अच्छे फल देने के लिए समर्थ है अथवा बुरे फल देने के लिए या एक सामान्य फल कथन है जो की सभी लगन और राशि वालों को स्वयं निर्णय लेना है कि यह फल उनके ऊपर किस प्रकार से लागू होगा इसका एक उदाहरण मैंने ऊपर दिया है उसी से समझने अन्यथा आप मुझे अपनी कुंडली का विश्लेषण करवा सकते हैं संपर्क कर सकते हैं

एक बात मैं और कहना चाहूंगा कि आपकी कुंडली में यदि सूर्य मंगल अथवा केतु की महादशा अंतर्दशा चल रही है तब ऐसी स्थिति में बनने वाला यह मंगल केतु का योग आपके ऊपर प्रभाव अवश्य डालेगा फिर वही बात आ जाती है और मैं बार-बार यही कहना चाहूंगा की सर्वप्रथम आपको यह जानना आवश्यक है कि आपकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति कैसी है सूर्य मंगल केतु की स्थिति कैसी है और तब इस वर्तमान महादशा अंतर्दशा के अनुसार ही आप उसका फल जान सकते हैं

वैसे सामान्य तौर पर कॉल पुरुष की कुंडली के अनुसार सिंह राशि में बनने वाले इस मंगल केतु युति का परिणाम संपूर्ण विश्व देश दुनिया के लिए कैसा रहेगा उसका भी फल में आपको बता दे रहा हूं सर्वप्रथम में यही आपको बता देता हूं निम्न प्रकार से इसका प्रभाव देश दुनिया पर पड़ेगा

काल पुरुष की कुंडली से सिंह राशि पंचम भाव में पड़ती है और पंचम भाव से मस्तिष्क का विचार किया जाता है पंचम भाव सिंह राशि का स्वामी सूर्य है और सूर्य ग्रहण का राजा है इसलिए ग्रहण के राजा पर इस मंगल केतु युति का प्रभाव पड़ रहा है और इसलिए संपूर्ण विश्व में जो भी राजा हैं उन सब पर इस मंगल केतु का असर दिखेगा इस प्रभाव के कारण देश दुनिया के सभी राजा क्रोधी हठि जिद्दी अड़ियल हो जाएंगे क्योंकि केतु सूर्य के नक्षत्र में 10 नवंबर 2024 से चल रहे हैं और 20 जुलाई 2025 तक रहेंगे वर्तमान समय में सिंह राशि और की राशि सिंह में केतु के बैठने के कारण सूर्य पर केतु का प्रभाव है इसलिए सूर्य यानी राजा पर देश दुनिया के सभी राजा पर केतु का प्रभाव दुगना चल रहा है क्योंकि केतु राजा सूर्य की राशि और नक्षत्र दोनों में है नक्षत्र में 20 जुलाई तक रहेगा और राशि में डेढ़ वर्ष रहेगा इसलिए मंगल केतु युति का गंभीर अशुभ परिणाम राजा पर देखने को मिलेगा ऐसी स्थिति में तेज दुनिया के कई राजाओं का सर्वनाश हो सकता है किसी राजा की मृत्यु की संभावना है राजा पर हमले की संभावना है और राजा पर हमले अथवा घटना दुर्घटना संभावना है  इसलिए देश दुनिया में इस मंगल केतु युति का परिणाम 20 जुलाई तक देश दुनिया के राजाओं पर भारी पड़ेगा क्योंकि यह युति सिंह राशि अग्नि तत्व राशि में दो अग्नि तत्व ग्रह मंगल और केतु जो की विध्वंस के कारक ग्रह भी है इसे बन रहा है इसलिए तीन अग्नि तत्व की ऊर्जा एक स्थान पर एकत्र हो जाएगी ऐसी स्थिति में राजा अपनी बुद्धि तर्क विवेक का इस्तेमाल नहीं करेगा और कुछ भी उल्टा सीधा कर सकता है कोई भी राजा दुर्बुद्धि जिद्दी होकर गलत फैसला ले सकता है क्योंकि मंगल की दृष्टि शनि पर भी पड़ेगी इसलिए भी ऐसी संभावना है कि जल्दबाजी में गलत फैसले लिए जाएंगे और इन 51 दिनों में देश दुनिया में ऐसी घटनाएं घटेंगी जो प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार हूं

काल पुरुष की कुंडली के अनुसार लगन और अष्टम भाव का स्वामी मंगल जिसे सेवा का कारक ग्रह भी माना जाता है वह पंचम भाव जो कि हमारा दिमाग है मस्तिष्क है वहां पर पहुंच रहा है और जब मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेगा तब वह केतु के नक्षत्र में भी प्रवेश करेगा ऐसी स्थिति में मंगल केतु की युति के साथ-साथ मंगल का केतु के नक्षत्र में प्रवेश करने से मंगल पर केतु का अधिक प्रभाव पड़ जाएगा और इसलिए इस युवती के कारण मंगल का प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि मंगल अपने मित्र की राशि में आ रहा है और यहां मंगल के बाल को प्रभाव को केतु कई गुना बढ़ा सकता है क्योंकि केतु भी सिंह राशि में सूर्य की राशि में ही है या राजा को बहुत अधिक ताकतदे सकता है और इस ताकत बाल का इस्तेमाल राजा गलत तरीके से कर सकता है 

क्योंकि मंगल अष्टम भाव का भी स्वामी बनता है इसलिए यहां एक बहुत बड़ी घटना के घटना की संभावना है राहु केतु बड़ी घटना को ही अंजाम देते हैं इसलिए मंगल केतु की युति में एक बहुत बड़ी घटना विश्व में देखने को मिलेगी मंगल और केतु दोनों विध्वंस के कारक ग्रह हैं शक्ति ताकत के प्रतीक हैं ऐसी स्थिति में शक्ति प्रदर्शन बहुत होगा देश दुनिया में यदि युद्ध होता है तो उसमें घटक संहारक हथियारों का इस्तेमाल होगा ऐसे हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है जो शायद पहली बार हो परमाणु युद्ध की भी संभावना बन सकती है

काल पुरुष की कुंडली से पंचम भाव मस्तिष्क का है और यहां मंगल केतु की युति के कारण दिमाग बहुत गर्म हो सकता है और ग्राम दिमाग से गर्म फैसला ही हो सकते हैं इसलिए राजाओं के दिमाग गरम हो सकते हैं और इस गर्मी से ही जो भी फैसला निकाल कर आएगा उसका परिणाम बुरा ही नहीं मिलेगा क्योंकि मंगल के दृष्टि शनि पर भी है इसलिए फैसला लेने में जल्दी होगी

काल पुरुष की कुंडली से देखेंगे तो मंगल की एक दृष्टि चौथी दृष्टि अष्टम भाव अपनी ही राशि वृश्चिक पर पड़ेगी इसलिए आठवीं घर की घटनाएं घटित होगी अष्टम भाव दुर्घटना का और बड़ी घटना का भाव है अपनी ही राशि पर मंगल के दृष्टि से बड़ी-बड़ी घटनाएं दुर्घटनाएं होगी अष्टम भाव से जमीन के नीचे का पाताल का विचार किया जाता है ज्वालामुखी घटनाएं भी हो सकती हैं भूकंप की घटनाएं भी हो सकती हैं या भाव मृत्यु का है इसलिए बहुत अधिक लोगों के मृत्यु और मारे जाने की संभावना है क्योंकि मंगल सेवा का कारक ग्रह है सैनिक का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए मंगल केतु युति में सी का स्वभाव बदल सकता है सैनिक बहुत ज्यादा आक्रामक हो सकती है और ऐसी स्थिति में मरने मरने पर उतारू हो जाने की स्थिति बन सकती है ऐसी स्थिति में बहुत अधिक सैनिकों के मारे जाने की संभावना है

मंगल की एक दृष्टि सप्तम दृष्टि एकादश भाव पर पड़ेगी और एकादशी भाव गंभीर रोगों का है और आमदनी का है अमीर लोगों का है और यहा खुद राहु बैठा है राहु पर भी मंगल की दृष्टि पड़ेगी राहु भी दिमाग का कारक ग्रह है देश दुनिया में बड़े अमीर लोगों बड़े-बड़े लोगों के साथ बड़ी-बड़ी घटनाएं घट सकती हैं कई अमीर लोगों का सत्यानाश हो सकता है उनका पतन हो सकता है अमीर गरीब भी हो सकते हैं नुकसान की संभावना बहुत अधिक है मंगल की दृष्टि अष्टम और एकादश दोनों भाव पर पढ़ रहा है अष्टम और एकादशी से शेयर मार्केट का विचार किया जाता है इसलिए शेयर बाजार में अपना तफरी का माहौल रहेगा बहुत अधिक शेयर के चढ़ने अथवा बहुत अधिक गिरने का इतिहास बनेगा  मंगल की एक अष्टम दृष्टि द्वादश भाव हनी भाव अध्यात्म के भाव मीन राशि पर पड़ेगी और यहां पहले से ही दशम और एकादश भाव के स्वामी शनि बैठे हैं जो की 29 मार्च से ही द्वादश भाव में हलचल मचाई हुए हैं ऐसे में मंगल की दृष्टि भी पढ़ने के कारण द्वादश भाव और भी ज्यादा एक्टिवेट हो जाएगा द्वादश भाव से हम मूंछ का मुक्ति का विचार भी करते हैं इसलिए इस भाव में बैठे शनि और शनि पर मंगल की दृष्टि के कारण बहुत से लोगों की नौकरी और आमदनी पर असर पड़ सकता है कई लोगों की नौकरियां जाएंगी देश दुनिया में बड़े स्तर पर लोगों को नौकरियां से निकाला जा सकता है द्वादश भाव से बाहरी लोगों का विचार किया जाता है इसलिए ऐसे समय पर देश में जो भी घुसपैठिए हैं देश दुनिया में सभी देश अपने-अपने देश के में रहने वाले बाहरी लोगों विदेशी लोगों पर बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं और इन जो लोग विदेश में बसे हैं ऐसे लोगों के जीवन में कष्ट रहेगा ज्यादातर विदेश में रहने वाले लोगों पर खतरा रहेगा उनके साथ अशुभ घटनाएं घट सकती हैं          


अब हम सूर्य पर विचार करते हैं कि वर्तमान समय में काल पुरुष की कुंडली के अनुसार सूर्य किस स्थान पर बैठा है तो जैसा की 15 में से सूर्य वृष राशि धन भाव में बैठा है जो 15 जून तक रहेगा इसलिए 7 जून से 15 जून तक सूर्य की स्थिति द्वितीय भाव धान भाव पर होगी और सूर्य पर केतु का प्रभाव है इसलिए इस प्रभाव के कारण सूर्य पर केतु का प्रभाव माना जाएगा और इसलिए सूर्य को केतु ही माना जाएगा इसलिए द्वितीय भाव में केतु के बैठने से सूर्य के बैठने से वाणी के भाव में धन के भाव में सूर्य के होने पर धन संबंधी और बोली भाषा से संबंधित वाद विवाद सामने आ सकते हैं अब क्योंकि राजा ही और है इसलिए राजा के बोलने से ही झगड़ा उत्पन्न हो सकते हैं देश के सभी राजा उल्टा सीधा बोल सकते हैं बयान दे सकते हैं ऐसे बयानों से युद्ध की स्थितियां उग्र हो सकती है युद्ध बढ़ सकता है खतरनाक हो सकता है जैसा कि वर्तमान में चल भी रहा है और जब मंगल केतु बन जाएगी तो यह स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है द्वितीय भाव में सूर्य के होने पर परिवार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है देश दुनिया में जो भी परिवार हैं जैसे राजनीतिक दल राजनीति वाले परिवार वहां पर भी इसका असर देखने को मिलेगा इसलिए राजनीतिक पारिवारिक विघटन विवाद सामने आएंगे

काल पुरुष की कुंडली से केतु पंचम भाव में मस्तिष्क वाले भाव में बैठे हैं और इसलिए देश दुनिया में लोगों का दिमाग एक तरह का हो सकता है एक ही चीज में अटक सकता है ऐसी स्थिति राजा की जरूर होगी जब राजा का दिमाग एक जैसी स्थिति में रहेगा उसमें तर्कशक्ति काम नहीं करेगी और वह अपनी ही जिद और है में रहेगी ऐसी जिदके कारण युद्ध की स्थितियां गंभीर बनेगी निर्णय सही नहीं हो सकते हैं ज्यादातर राजाओं के निर्णय गलत ही रहेंगे लेकिन एक दो राजा को इस निर्णय से लाभ मिलेगा और उसे झंडा फहराने का अवसर मिलेगा यहां पर इस युति में कई देश एक दूसरे पर अधिकार अतिक्रमण करने की कोशिश करेंगे और यह कोशिश कुछ लोगों के लिए कामयाब भी होगी

काल पुरुष की कुंडली से पंचम भाव में बैठे केतु की पांचवी दृष्टि धर्म भाव नवम भाव पर पड़ेगी और इस दृष्टि से धार्मिक स्थान पर धार्मिक यात्राओं पर बुरे परिणाम देखने को मिल सकते हैं केतु की दृष्टि अध्यात्म का कारक है इसलिए लोगों में धर्म के प्रति रुचि बढ़ सकती है उनमें अपने धर्म को लेकर कट्टरता अधिक देखने को मिलेगी धार्मिक लोगों के साथ दुर्घटनाओं की संभावना भी ज्यादा रहेगी जो भी लोग धर्म से संबंधित उच्च स्तर पर हैं उच्च पद पर हैं उनके साथ घटना दुर्घटना के योग बन रहे हैं केतु की एक दृष्टि लग्न पर मंगल की राशि मेष पर पड़ेगी और मंगल केतु के साथ ही है इसलिए समस्त मानव जाति का विचार मेष राशि से किया जाता है अष्टम भाव का स्वामी भी मंगल है अष्टम भाव से मृत्यु का विचार किया जाता है लग्नेश मंगल अष्टमेश मंगल का केतु के साथ  होना बहुत अधिक लोगों की मृत्यु होना बताता है या मृत्यु किसी बीमारी अथवा दुर्घटना युद्ध से हो सकता है बड़ी-बड़ी कुछ घटनाएं होंगी जिनमें एक साथ बहुत अधिक लोगों के मारे जाने की संभावना है वर्तमान में चल रही कोरोना बीमारी के कारण अभी मृत्यु की संभावना बढ़ सकती है द्वादश भाव में शनि के बैठने से भी अस्पताल में लोगों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि द्वादश भाव से अस्पताल का विचार किया जा सकता है और यहां पर मंगल की दृष्टि भी पड़ेगी इसलिए अस्पताल में भी बुरी घटनाएं देखने को मिलेगी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ेगी ऐसी स्थिति देश दुनिया के सभी अस्पतालों में देखने को मिलेगी

सभी राशियों पर इसका क्या असर होगा  इसका संक्षिप्त विवरण  दे रहा हूं विस्तृत रूप से जानने के लिए अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाने के लिए संपर्क करें क्योंकि सभी की कुंडली के अनुसार अलग-अलग फल होगा

मेष राशि अथवा लग्न दिमाग गर्म रहेगा तेजी से काम करेगा किसी चीज में दिमाग फंस सकता है एक ही प्रकार की सोच में फंस सकते हैं आमदनी में वृद्धि होगी खर्च और अधिक होने लगेंगे पैतृक संपत्ति का लाभ मिल सकता है ज्योतिष प्रेमी के ज्ञान में वृद्धि हो सकती है गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है प्रेम प्रसंग में फंस सकते हैं पुराने प्रेमी वापस आ सकते हैं संतान संबंधित कष्ट संभव है और संतान से नाम अथवा यश प्रसिद्धि का योग बन सकता है बाहर अथवा विदेश यात्रा संभव है अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है किसी विवाद में फंस सकते हैं यदि कोई कोर्ट केस हैं तो उसका निपटारा हो सकता है घटना दुर्घटना से बच क्योंकि केतु की दृष्टि लग्न पर है और केतु मंगल के साथ है

वृष राशि अथवा लग्न इनके चतुर्थ भाव में मंगल केतु यूपी के कारण भूमि भवन वाहन संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती है परिवार का माहौल खराब हो सकता है घर में झगड़ा हो सकते हैं 15 जून तक लग्न में सूर्य के होने से शारीरिक कष्ट हो सकता है लेकिन नाम भी प्राप्त होगा लगे शुक्र द्वादश भाव में है इसलिए विदेश भ्रमण और सुख में वृद्धि सुख की चीजों में खर्च हो सकता है लेकिन शारीरिक सुख में कमी भी हो सकती है मेहनत अधिक रहेगा भाग दौड़ अधिक रहेगी धन की कमी महसूस हो सकती है कर क्षेत्र में बदलाव अथवा नुकसान संभव है मंगल की एकादशी पर दृष्टि है और शनि पर दृष्टि है इसलिए नौकरी व्यवसाय कार्य क्षेत्र में नुकसान की संभावना है परिश्रम अधिक करना पड़ेगा वृष राशि लग्न वालों के दशम भाव में राहु हैं और उसे पर मंगल गुरु की दृष्टि भी पढ़ रही है इसलिए इनका कर्म क्षेत्र से संबंधित घटनाएं अधिक होगी यहां पर अपना ध्यान केंद्रित करें

मिथुन राशि अथवा लग्न तीसरे घर में मंगल केतु की युति होगी इसलिए कुछ लोग साहस अतसाहस द:साहस भारी कार्य कर सकते हैं जिससे उन्हें हानि हो सकती है नुकसान हो सकता है बहुत ज्यादा रिस्क वाला कार्य न करें ज्यादा साहस का परिचय ना दें  और यदि ईश्वर ने चाहा तो इस साहस से आपका नाम भी हो सकता है आपके पराक्रम की प्रशंसा हो सकती है मंगल की दृष्टि भाग-भाव पर दशम भाव पर रहेगी शनि पर भी पड़ेगी इसलिए यदि नौकरी करते हैं तो सावधान रहें काम का बोझ बढ़ सकता है और नौकरी में समस्या उत्पन्न हो सकती है भाग्य में कमी देखने को मिलेगी लग्न में गुरु भी बैठा है इसलिए कोई भी गलती करेंगे तो गुरुजी दंड भी देंगे इसलिए नियम अनुशासन से कम करें मंगल की एक दृष्टि छठे घर पर पड़ रही है इसलिए शत्रु बाधा और यदि कर्ज लिया है तो परेशानी हो सकती है क्योंकि बुद्ध का मंगल शत्रु है इसलिए मिथुन वालों के लिए मंगल केतु की युति तभी अच्छी होगी जब उनकी कुंडली में मंगल ठीक हो और केतु भी अच्छा हो अन्यथा नुकसान ही हो सकता है ज्यादा गुस्सा नुकसान दे सकता है छोटे भाई का कारक ग्रह मंगल तीसरे ही घर में है इसलिए छोटे भाई बहनों पड़ोसियों से झगड़ा ना करें सावधान रहें

कर्क राशि अथवा लगे कर्क राशि अथवा लगने के लिए मंगल कारक ग्रह हैं पंचम और दशम भाव के स्वामी है इसलिए मंगल शुभ होते हैं इनके द्वितीय भाव में मंगल केतु की युति बनेगी और इसलिए इन्हें अचानक बहुत अधिक मात्रा में धान की प्राप्ति हो सकती है जो पैसों की समस्या कई महीनो से है वह दूर हो सकती है और पंचम भाव पर मंगल खुद की दृष्टि डालेगा इसलिए दिमाग ठीक से काम करेगा मस्तिष्क अच्छे से कार्य करेगा लेकिन केतु के साथ होने के कारण दिमाग किसी चीज में फंस सकता है जो लोग प्रेम प्रसंग में है उन्हें सावधानी रखनी चाहिए पुराने प्रेमी की वापसी हो सकती है यदि कोई कोर्ट केस हैं किसी प्रकार का विवाद है तो उसका निपटारा हो सकता है क्योंकि मंगल की दृष्टि अष्टम पर पड़ रही है मंगल की दृष्टि भाग भाव पर भी पड़ेगी इसलिए भाग्य में वृद्धि होगी द्वितीय भाव का स्वामी सूर्य लाभ भाव में है इसलिए अचानक लाभ मिल सकता है आमदनी में वृद्धि हो सकती है

सिंह राशि अथवा लग्न इनके राशि में ही मंगल केतु की युति है मंगल मित्र है इसलिए उनके लिए भी लग्न में बैठा मंगल केतु का योग उनके अंदर साहस पराक्रम भर देगा और इसे इन्हें किसी भी कार्य को करने में आसानी होगी और जो कर बहुत महीने से हिम्मत से नहीं कर पा रहे थे अब कर सकते हैं लेकिन लड़ाई झगड़े से सावधान रहना है यहां मंगल केतु मिलकर किसी बड़ी घटना दुर्घटना कर सकते हैं यदि समय खराब चल रहा है तो उसका नुकसान हो सकता है और यदि आपका समय महादशा अंदर दशा ठीक-ठाक है तब आपको या मंगल केतु लग्न में आपको नाम देगा आपके कार्य क्षेत्र में नाम देगा क्योंकि 15 जून तक लगे सूर्य दशम भाव में बैठा रहेगा इसलिए 7 जून से 15 जून तक जो भी कार्य संपन्न करना चाहते हैं उसमें सफलता मिलेगी  कुल मिलाकर कई वर्षों बाद मन की मुराद पूरी हो सकती है बहुत बड़ी सफलता मिल सकती है मंगल की दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ेगी जहां राहु बैठा है इसलिए वैवाहिक जीवन का कष्ट रहेगा पत्नी से दूरियां बन सकती है लड़ाई झगड़ा वाद विवाद हो सकते हैं या योग सप्तम भाव के लिए ठीक नहीं रहेगा जिन लोगों का कोर्ट केस तलाक का चल रहा है उन्हें समस्या उत्पन्न हो सकती है क्योंकि मंगल की एक दृष्टि अष्टम भाव पर भी पड़ रही है अष्टम भाव से विवाद का निपटारा देखा जाता है  मंगल की एक दृष्टि चतुर्थ भाव खुद के राशि वृश्चिक पर पढ़ रहे हैं इसलिए यदि आप भूमि भवन वाहन संबंधित सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो उचित समय है जमीन मकान में वृद्धि अथवा जीरो धार कर कर सकते हैं अथवा उनके माध्यम से धन अर्जित कर सकते हैं 51 दिन तक आपका दिमाग किसी एक चीज में फंस सकता है कोई एक विचार सोच अथवा कार्य में आपका पूरा ध्यान केंद्रित रहेगा

कन्या राशि अथवा लग्न कन्या के लिए मंगल शत्रु ग्रह है और सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला ग्रह मंगल ही है इसलिए आपको अपनी कुंडली में केतु को भी देखना चाहिए कि केतु कैसा है यदि केतु भी खराब है तब कन्या वालों के लिए मंगल केतु का या योग जो की द्वादश भाव में बनेगा अच्छा नहीं रहेगा इस योग के कारण खर्च की अधिकता रहेगी अचानक खर्च होंगे और अगर अपने कर्ज लिया है तो कर्ज चुकाने के लिए दबाव बढ़ सकता है कोड कैसे अथवा मुकदमा का सामना कर सकता धरना पड़ सकता है लड़ाई झगड़ा वाद विवाद से भी बचाना है 51 दिन हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ाते हुए निकाल दें और जिन लोगों का समय अच्छा है वह इस दौरान कर्ज से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं मंगल के दृष्टि छठे और सातवें घर पर भी पड़ेगी इसलिए पतली से विवाद की संभावना है पत्नी से सुख में कमी रहेगी वैवाहिक जीवन में कष्ट हो सकता है सप्तम भाव व्यवसाय का है इसलिए व्यवसाय में भी समस्या उत्पन्न हो सकती है जहां पर पहले से ही सनी बैठे हैं इसलिए आपके व्यवसाय में परिवर्तन की उम्मीद करनी चाहिए यदि कोई परिवर्तन चाहते हैं तो कर सकते हैं मंगल की एक दृष्टि तीसरे भाव पर पड़ेगी तीसरा घर छोटे भाई बहन पड़ोसियों का है इसे भी सावधान रहें इसे संबंध खराब हो सकते हैं 12वीं घर से अस्पताल और जेल थाना पुलिस का भी विचार किया जाता है यहीं पर मंगल केतु का योग बन रहा है

तुला राशि अथवा लग्न तुला वालों के लिए मंगल सप्तम और द्वितीय भाव का स्वामी है इसलिए प्रबल मार्गेश ग्रह है यानी मृत्यु टूल कष्ट देने वाला ग्रह मंगल है ना जीने देता है ना मरने देता है अब आपकी कुंडली के लाभ भाव में एकादश भाव में यह योग बनेगा और यदि आपकी कुंडली में मंगल केतु शुभ है तब तो आपको बहुत अधिक आमदनी का लाभ मिल सकता है अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है अन्यथा बहुत बड़ा नुकसान संभव है मंगल की दृष्टि स्वभाव खुद की धान भाव पर पड़ेगी द्वितीय भाव पर पड़ेगी इसलिए परिवार में लड़ाई झगड़ा हो सकते हैं लेकिन अपनी ही राशि वृश्चिक पर मंगल की दृष्टि से धन की प्राप्ति भी हो सकती है मंगल की एक दृष्टि पंचम भाव पर पड़ेगी जहां पर राहु बैठा है इसलिए आपका दिमाग खराब हो सकता है मस्तिष्क संबंधी कष्ट मिल सकते हैं संतान संबंधी कष्ट भी मिल सकते हैं जिन लोगों का प्रेम प्रसंग है उन्हें ब्रेकअप का सामना करना पड़ सकता है मंगल की दृष्टि छठे घर पर भी है शत्रु बाधा उत्पन्न हो सकती है और जिन लोगों ने कर्ज लिया है उन्हें समस्या उत्पन्न हो सकती है

वृश्चिक राशि लगन वृश्चिक राशि लग्न वालों का कारक ग्रह मंगल पिछले 7 महीने से भाग भाव में नीचे का था...! 

इस लिए इन्हें भाग्य वर्ष सफलता नहीं मिल पा रही थी....! 

समय खराब चल रहा था और मंगल के कमजोर होने के कारण उसकी एक दृष्टि द्वादश भाव पर पढ़ रही थी....! 

खर्च की अधिकता थी और गृह जीवन में भी कोई सफलता नहीं मिल रही थी....! 

अब मंगल दशम भाव में उच्च का होकर केतु के साथ बैठेगा और लगन पर दृष्टि करेगा....! 

अब यदि आपकी कुंडली में केतु अच्छा है तब या मंगल केतु की युति दशम भाव में आपको ऊंचाई पर ले जाएगी....! 

आपको साहस प्रदान करेगी कर क्षेत्र में नाम देगी यस देगी प्रसिद्ध देगी और अगर आप नौकरी करते हैं....! 

तो प्रमोशन होगा लग्न पर मंगल की दृष्टि रहेगी....! 

इस लिए शारीरिक सुख में वृद्धि होगी और नाम भी मिलेगा प्रतिष्ठा में चार चांद लगेगा चतुर्थ भाव में राहु बैठा है....! 

और उसे पर भी मंगल की दृष्टि पड़ेगी राहु भी अच्छा है....! 

तो आपको भूमि भवन वाहन का लाभ मिलेगा जो लोग मकान अथवा जमीन खरीदने अथवा बनवाने की सोच रहे हैं.....! 

तो बहुत अच्छा समय है सफलता मिलेगी मंगल की एक दृष्टि पंचम भाव पर भी पड़ेगी जहां पर शनि बैठा है....! 

दिमाग तो खराब होगा लेकिन बुद्धि भी ठीक हो जाएगी....! 

यदि प्रेम प्रसंग किसी का है तो प्रेमी से टकराव की संभावना बढ़ेगी पुराने प्रेमी से मिलने की संभावना बनेगी पंचम भाव से संतान सुख देखा जाता है....! 

इस लिए संतान से सुख मैं वृद्धि होगी और यदि आपकी कुंडली में मंगल केतु खराब है....! 

तो आपको सावधान रहना चाहिए नौकरी भी जा सकती है....! 

किसी चीज में फंस सकते हैं बदनामी भी हो सकती है दिमाग भी खराब होगा गृहस्थ जीवन में भी समस्या उत्पन्न होगी घर में लड़ाई झगड़ा होंगे संपत्ति का बंटवारा हो सकता है....! 

बाहर जाने के भी संकेत हैं विदेश यात्रा संभव है भागम भाग हो सकता है....!  

क्योंकि अष्टम में गुरु है इसलिए आपको पंचम भाव से संबंधित समस्या ज्यादा रहेगी.....! 

दिमागी समस्या हो सकती है जो लोग ज्योतिष अथवा गुप्त ज्ञान से संबंधित कार्य करते हैं....! 

उनके लिए समय अच्छा रहेगा ज्योतिष कर से लाभ मिलने की संभावना है गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है....! 

दशम भाव में केतु ऐसे लोगों को बताता है जो लोग किसी की समस्या का समाधान करते हैं परेशान और पीड़ित लोगों की मदद अथवा कार्य करने वाले लोगों के लिए या मंगल केतु का योग अच्छा रहेगा जैसे डॉक्टर वकील ज्योतिषी इस तरह के कार्य करने वाले

धनु राशि अथवा लग्न धनु राशि के लिए भी मंगल कारक ग्रह है और या भाग्य भाव में मंगल केतु की युति बनेगी....! 

इस लिए इन्हें अचानक भाग में वृद्धि देखने को मिलेगी सभी काम बनने लगेंगे....! 

पिछले कई महीने से अष्टम में बैठे मंगल के कारण इन्हें दिमागी समस्या थी....! 

अब वह दूर हो जाएगी भाग्य का साथ मिलेगा लग्न पर गुरु की भी दृष्टि पड़ रही है.....! 

इस लिए इन्हें प्रतिष्ठा मान सम्मान की प्राप्ति होगी मंगल की दृष्टि द्वादश भाव पर पड़ेगी खर्च अधिक रहेंगे मंगल की एक दृष्टि तीसरे भाव में बैठे राहु तीसरे भाव पर पड़ेगी....! 

इस लिए छोटे भाई बहन पड़ोसियों से दूरी उनसे वैचारिक मनमुटाव हो सकता है....! 

मंगल की दृष्टि चतुर्थ भाव पर भी पड़ेगी यह भूमि संपत्ति के लिए ठीक रहेगा....! 

लेकिन पारिवारिक माहौल ठीक नहीं रहेगा कुल मिलाकर धनु राशि अथवा लग्न वालों को अपनी कुंडली में केतु का विचार करना चाहिए....! 

यदि केतु अच्छा है तब आपके लिए या मंगल केतु की युति 51 दिन में आपके भाग्य में अचानक वृद्धि करके आपकी बहुत बड़े कार्य को संपन्न करवा सकती है....!

मकर राशि अथवा लग्न मकर के अष्टम भाव में मंगल केतु की युति बनेगी और मकर वालों के लिए ना तो मंगल अच्छा होता है....! 

ना ही और अच्छा होता है....! 

इस लिए मकर वालों के लिए मंगल केतु की युति अष्टम भाव में ठीक नहीं रहेगी...! 

क्योंकि इनके राशि स्वामी शनि पर भी मंगल की दृष्टि 7 जून से पढ़ने लगेगी....! 

इस लिए मकर वालों के लिए शारीरिक कष्ट मेहनत अधिक और किसी घटना दुर्घटना के संकेत मिल रहे हैं...! 

जिन कोर्ट केस उन्हें हर का सामना करना पड़ सकता है अथवा किसी नई मुसीबत में पढ़ सकते हैं....!  

मकर वालों का शनि तीसरे घर में बैठा है और तीसरे घर पर अष्टम भाव में बैठे मंगल की दृष्टि भी पड़ेगी.....! 

इस लिए छोटे भाई - बहन पड़ोसियों से झगड़ा की संभावना है....! 

और यदि आप कोई साहस वाला कार्य करते हैं तो सावधान रहें....! 

ज्यादा हिम्मतवाला कार्य करने पर विवाद में फंस सकते हैं....! 

क्योंकि मंगल की दृष् द्वितीय भाव पर भी पड़ रही है....! 

इस लिए परिवार में कल की संभावना है....! 

धन का नुकसान भी हो सकता है...! 

द्वितीय भाव में राहु भी बैठा है परिवार से अलगाव की भी संभावना है....! 

कुल मिलाकर मकर वालों के लिए मंगल केतु की युति ठीक नहीं रहेगी यदि मंगल और केतु कुंडली में शुभ है अथवा महादशा अंतर्दशा अच्छे ग्रह की चल रही है....! 

तब तो बच जाएंगे हल्के में निपट जाएंगे

कुंभ राशि अथवा लग्न कुंभ वालों के लिए भी सूर्य सप्तम भाव का स्वामी है मार्केट है....! 

और मंगल भी अच्छा नहीं माना जाता है हालांकि दशम भाव का स्वामी है....! 

लेकिन तीसरे भाव का भी स्वामी है....! 

मंगल केतु की युति सप्तम भाव में बनेगी और मंगल की दृष्टि लग्न पर पड़ेगी और लगन के स्वामी शनि पर पड़ेगी दूसरे भाव पर पड़ेगी या संयोग बताता है....! 

कि आपका अपने परिवार से पत्नी से विवाद हो सकता है दूरियां हो सकती है....! 

लड़ाई झगड़ा हो सकते हैं और आपके साथ भी विचित्र स्थिति हो सकती है....! 

आपके साथ भी कष्टकारी स्थिति हो सकती है....! 

किसी प्रकार की घटना अथवा दुर्घटना से सावधान रहे धन का नुकसान हो सकता है....! 

दशम भाव पर मंगल की दृष्टि खुद की पड़ेगी....! 

इस लिए कार्य क्षेत्र में वृद्धि हो सकती है....! 

प्रमोशन हो सकता है कम ज्यादा करेंगे मेहनत ज्यादा करने लगेंगे मंगल पर लग्न की दृष्टि से गुस्सा बढ़ेगा....! 

इस गुस्से पर आपको काबू करना है लग्न पर गुरु की दृष्टि भी पड़ रही है....! 

इस लिए नियम अनुशासन ईमानदारी से रहना पड़ेगा अन्यथा आपको दंड भुगतना पड़ेगा कुंभ वालों के लिए भी मंगल केतु की युति अच्छी नहीं कहीं जा सकती है सावधानी रखें 

मीन राशि अथवा लग्न मीन राशि के लिए मंगल भाग भाव के स्वामी धान भाव के स्वामी है और छठे घर में मंगल केतु की युति बन रही है....! 

छठे घर में मंगल का बैठना ठीक होता है....! 

इस लिए यदि मीन राशि वालों का कोई कोड कैसे हैं....! 

किसी से झगड़ा लड़ाई है उसमें जीत हासिल हो सकती है कोई कर्ज लिया है....! 

तो उसका निपटारा कर सकते हैं....! 

कर्ज चुकाने में सहायता मिलेगी अचानक कर्ज भी चूक सकते हैं...! 

मीन राशि में ही शनि महाराज बैठे हैं और मीन राशि लग्न पर ही मंगल की दृष्टि भी पड़ेगी इस दृष्टि के कारण तो आपको अच्छा फल मिलेगा....! 

लेकिन शनि के बैठने से आपको सिख और सबक भी मिल रही है....! 

पिछली गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ने का समय है 3 महीने में सीख जाएंगे की जीवन क्या है....!  

चंद्र राशि मीन वालों की साडेसाती भी चल रही है....! 

इस लिए या शनि इन्हें बनाने का कार्य करेगी  पिछले 7 महीने से इनके भाग भाव का स्वामी मंगल पंचम भाव में नीचे का था....! 

इस लिए भाग साथ नहीं दे रहा था और दिमाग भी खराब था....! 

लेकिन अब मंगल छठे घर में मजबूत स्थिति में जाएगा एक दृष्टि भाग भाव पर ही पड़ेगी...! 

इस लिए भाग्य में वृद्धि होगी भाग साथ देगा जो भी आप कार्य करना चाहते हैं कर सकते हैं...! 

अपने जीवन का सही फैसला ले सकते हैं लग्न में बैठा शनि आपको उन्नति दे सकता है...! 

यदि आप बेरोजगार हैं तो रोजगार मिल सकता है.....! 

लेकिन फिर भी कुंडली में शनि की स्थिति मंगल की स्थिति केतु की स्थिति का आकलन कर ले यदि आपकी कुंडली में मंगल शनि केतु अच्छे स्थिति में है और महादशा अंतर्दशा भी अच्छी चल रही है...! 

तभी आपके साथ ऐसा होगा अन्यथा लग्न में बैठा सनी आपको अभी कष्ट देता रहेगा जब तक कि आप खुद को सुधार नहीं लेते हैं और भ्रम से दूर नहीं हो जाते हैं....! 

मीन राशि वाले दूसरों पर विश्वास करके धोखा खाते हैं...! 

इस लिए अब उन्हें शनि समझाएगा कुछ रिश्ते उनसे तुड़वाएगा और जीना सिखाएग 

यह एक सामान्य फल कथन था...! 

यदि आप अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहते हैं और अपनी कुंडली के अनुसार सटीक रूप से जानना चाहते हैं....! 

कि आपके लिए मंगल केतु का फल कैसा रहेगा तो संपर्क कर सकते हैं उचित दक्षिण मान्य होगी 
जय श्री राम अयोध्या धाम

         !!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanath Swami Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar,  RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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