।।जातक के जीवन मे पुनर्विवाह के योग ज्योतिष शास्त्र पर कैसा फ़लप्रदान होता है / વૈકુંઠ અગિયારસ ક્યારે છે, જાણો શુભ મુહૂર્ત અને મહત્વ ।।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।।जातक के जीवन मे पुनर्विवाह के योग ज्योतिष शास्त्र पर कैसा फ़लप्रदान होता है / વૈકુંઠ અગિયારસ ક્યારે છે, જાણો શુભ મુહૂર્ત અને મહત્વ ।।


।।जातक के जीवन मे पुनर्विवाह के योग ज्योतिष शास्त्र पर कैसा फ़लप्रदान होता है  ।।

★★* जातक का जीवन मे पुनर्विवाह के योग है ? जातक को ज्योतिष शास्त्र से कैसा फ़लप्रदान होता है*


✍🏻 1️⃣ ज्योतिषशास्त्र के अनुसार दूसरे विवाह को देखने के लिए सप्तम, नवम तथा सप्तम से छठे अर्थात द्वादश भावों पर विशेष विचार करना चाहिए  ज्योतिषाचार्य पं. प्रभु राज्यगुरु  ने बताया कि यदि लग्न, सप्तम स्थान और चंद्र लग्न द्विस्वभाव राशि में हों, तो जातक के दो विवाह होते हैं। 




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2️⃣ इसी प्रकार लग्नेश, सप्तमेश तथा शुक्र द्विस्वभाव राशि में हों, तो जातक के दो विवाह होते हैं। 

3️⃣ यदि सप्तम और अष्टम में पापी ग्रह हों और मंगल द्वादश स्थान में हो, तो जातक के दो विवाह होते हैं।

4️⃣ सप्तम स्थान का कारक यदि पापी ग्रह से युत अथवा नीच नवांश अथवा शत्रु नवांश अथवा अष्टमेश के नवांश में हो, तो भी जातक के दो विवाह होते हैं। 

5️⃣ यदि सप्तमेश और एकादशेश साथ हों अथवा एक दूसरे पर दृष्टि रखते हों, तो जातक के कई विवाह होते हैं 









प्रेम संबंध के योग: प्रेम संबंध पंचम भाव से देखा जाता है। 

6️⃣लग्नेश एवं पंचमेश का संबंध ( चतुर्विध ) प्रेम संबंध का द्योतक होता है। 

7️⃣पंचमेश तथा सप्तमेश की एकादश भाव में युति भी प्रेम संबंध को बढ़ावा देती है। 

8️⃣ पंचमेश भाव में शुभकर्तरी तथा सप्तम भाव का पापी प्रभाव में होना एवं लग्नेश की पंचम भाव पर दृष्टि यह सारी ग्रह स्थिति प्रेम संबंध को बढ़ावा देती है.!!

जय श्री कृष्ण

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વૈકુંઠ અગિયારસ ક્યારે છે, જાણો શુભ મુહૂર્ત અને મહત્વ



હિન્દુ ધર્મમાં અગિયારસનું ઘણું મહત્વ છે. ધાર્મિક માન્યતાઓ અનુસાર આ દિવસે ભગવાન વિષ્ણુની પૂજા અને ઉપવાસ કરવાથી જાતકોને શુભ ફળ મળે છે.

વૈકુંઠ એકાદશી 2025 

હિન્દુ ધર્મમાં અગિયારસનું ઘણું મહત્વ છે. હિંદુ પંચાંગ મુજબ એકાદશી દર મહિને બે વાર આવે છે, 

એક સુદ પક્ષમાં અને બીજી વદ પક્ષમાં. 

આ દિવસે ભગવાન વિષ્ણુની પૂજા કરવામાં આવે છે. 

ધાર્મિક માન્યતાઓ અનુસાર આ દિવસે ભગવાન વિષ્ણુની પૂજા અને ઉપવાસ કરવાથી જાતકોને શુભ ફળ મળે છે. 

આપણે જાણીએ કે વર્ષ 2025ની પ્રથમ એકાદશી ક્યારે ઉજવવામાં આવશે 

તેનું શુભ મુહૂર્ત અને મહત્વ.


ક્યારે છે વર્ષ ની પ્રથમ અગિયારસ ?


હિંદુ પંચાંગ મુજબ વર્ષ 2025ની પહેલી એકાદશી 10 જાન્યુઆરીએ આવશે. 

નવા વર્ષ 2025ની પ્રથમ એકાદશી પોષ પુત્રદા એકાદશી છે, 

જેને વૈકુંઠ એકાદશી તરીકે પણ ઓળખવામાં આવે છે.


વૈકુંઠ એકાદશી શુભ મુહૂર્ત :


પંચાગ અનુસાર વૈકુંઠ એકાદશીના પારણાં 11 જાન્યુઆરીએ કરવામાં આવશે. 

આવી સ્થિતિમાં 11 જાન્યુઆરીએ સવારે 7.15 થી 8.21 વાગ્યા સુધી પારણાંનું શુભ મુહૂર્ત છે. 

વૈકુંઠ એકાદશીનું મહત્વ :


હિન્દુ ધર્મમાં એકાદશીનું વિશેષ મહત્વ છે. 

ખાસ કરીને ભગવાન વિષ્ણુ અને દેવી લક્ષ્મીની પૂજા માટે એકાદશીની ઉજવણી કરવામાં આવે છે. 

ધાર્મિક માન્યતાઓ અનુસાર જે લોકોને સંતાન નથી અને આ વ્રત રાખે છે અને સાચા દિલથી ભગવાન વિષ્ણુની પૂજા કરે છે 

તો ભગવાન તેમની મનોકામના પૂર્ણ કરે છે. 

આ સાથે એવું પણ માનવામાં આવે છે કે આ વ્રત રાખવાથી સુખ અને સૌભાગ્યમાં વધારો થાય છે.

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एकादशी तिथि का आध्यात्म एवं ज्योतिष में का महत्त्व :

हिंदू पंचाग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। 

इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। 

यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमादेवी करती हैं। 

एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री अंश तक होता है। 

वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का  निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री अंश तक होता है। 

एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। 

संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

एकादशी तिथि का ज्योतिष में महत्त्व :

यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। 

इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। 

इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। 

ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। 

यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है, जिसमें शुभ कार्य निषिद्ध होते हैं। 

बता दें कि एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। 

वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।

एकादशी तिथि में जन्मे जातक उदार और दूसरों के प्रति प्रेमभावना रखने वाले होते हैं। 

लेकिन इनमें चालाकी बहुत होती है। ये धनवान होते हैं और धार्मिक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। 

ये लोग अपने से बड़ों और गुरुओं का आदर सत्कार बहुत करते हैं। 

ये कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। 

इन जातकों को संतान सुख प्राप्त होता है और न्याया के मार्ग पर चलते हैं। 

कूटनीति की कला में माहिर होते हैं। 

एकादशी के शुभ कार्य

एकादशी तिथि के दिन व्रत उपवास, अनेक धर्मकृत्य, देवोत्सव, उद्यापन व धार्मिक कथा आदि कर्म करना उत्तम रहता है। इस दिन यात्रा भी करना शुभ होता है। 

आप एकदशी के दिन गृहप्रवेश कर सकेत हैं। 

इसके अलावा इस तिथि पर चावल या अन्न खाना वर्जित हैं। 

साथ ही गोभी, बैंगन, लहसुन व प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।

एकादशी तिथि के प्रमुख हिन्दू त्यौहार एवं व्रत व उपवास :

सफला एकादशी (पौष कृष्ण एकादशी)

पौष पुत्रदा एकादशी (पौष शुक्ल एकदशी)

षटतिला एकादशी (माघ कृष्ण एकादशी)

जया एकादशी (माघ शुक्ल एकादशी)

विजया एकादशी (फाल्गुन कृष्ण एकादशी)

आमलकी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी)

पाप मोचिनी एकादशी (चैत्र कृष्ण एकादशी)

कामदा एकादशी (चैत्र शुक्ल एकादशी)

वरुथिनी एकादशी (वैशाख कृष्ण एकादशी)

मोहिनी एकादशी (वैशाख शुक्ल एकादशी)

अपरा एकादशी (ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी)

निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी)

योगिनी एकादशी (आषाढ़ कृष्ण एकादशी)

देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी)

कामिका एकादशी (श्रावण कृष्ण एकादशी)

श्रावण पुत्रदा एकादशी (श्रावण शुक्ल एकादशी)

अजा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण एकादशी)

परिवर्तिनी/पार्श्व एकादशी (भाद्रपद शुक्ल एकादशी)

इंदिरा एकादशी (आश्विन कृष्ण एकादशी)

पापांकुश एकादशी (आश्विन शुक्ल एकादशी)

रमा एकादशी (कार्तिक कृष्ण एकादशी)

प्रबोधिनी/देवउठनी/देवोत्थान एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी)

उत्पन्ना एकादशी (मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी)

मोक्षदा एकादशी (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी)


         !!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Dhanlakshmi Strits , Marwar Strits, RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 WHATSAPP नंबर : + 91 7598240825 ( तमिलनाडु )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

वैदिक ज्योतिष शास्त्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र क्या है ?

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोप...