गजकेसरी योग का उत्तम संयोग :

गजकेसरी योग का उत्तम संयोग :

गजकेसरी योग का उत्तम संयोग :

जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं गोचर के ग्रहों के अनुसार प्रभाव, महत्व, फल, नियम और उपाय !

भारतीय ज्योतिष परंपरा में ग्रहों के योगों का विशेष महत्व माना गया है। 

उनमें गजकेसरी योग को शुभ, प्रतिष्ठादायक, ज्ञानवर्धक और उन्नति देने वाले 

प्रमुख योगों में गिना जाता है। 

“गज” शक्ति, स्थिरता, गरिमा और समृद्धि का प्रतीक है, जबकि “केसरी” सिंह के 

समान साहस, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रतीक माना जाता है। 

इस लिए परंपरागत ज्योतिषीय दृष्टि से गजकेसरी योग ऐसा संयोग माना जाता है 

जिसमें व्यक्ति के भीतर बुद्धि, विवेक, आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता बढ़ सकती है।



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सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का संयोग बना है। 

साथ ही कल चंद्रमा का गोचर मिथुन राशि में होने जा रहा है।

ऐसे में कल के दिन चंद्रमा और गुरु के बीच युति संबंध बनेगा। 

ऐसे में कल सावन के दूसरे मंगलवार पर गजकेसरी योग का उत्तम संयोग बन रहा है। 

साथ ही कल के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बना है। 

वैदिक ज्योतिष, खगोल संबंधी परंपराओं, अंकशास्त्र, हस्तरेखा, सामुद्रिक एवं वास्तु विचारों ;

तथा ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और विभिन्न पुराणों की धार्मिक - सांस्कृतिक शिक्षाओं 

को साथ रखकर इस विषय को समझने पर एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—

किसी एक योग को देखकर सम्पूर्ण जीवन का फल निश्चित नहीं किया जा सकता। 

जन्मलग्न, चंद्रमा, गुरु, भावेश, दशा - अंतरदशा, नवांश, अन्य ग्रहयोग, गोचर और कर्म—

इन सभी का विचार आवश्यक है। 

पुराणों और वेदों में आधुनिक जन्मकुंडली की तरह “गजकेसरी योग के सभी फल” एक ही 

स्थान पर वर्णित नहीं मिलते; 

इस लिए नीचे दिया गया विवेचन मुख्यतः पारंपरिक वैदिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और 

भारतीय धार्मिक प्रतीकों का समन्वित निरूपण है।

और कल मृगशिरा नक्षत्र के संयोग में वृद्धि योग भी प्रभाव हुआ है जिससे कल का दिन 

भगवान भोलेनाथ और हनुमानजी की कृपा से कन्या सहित 5 राशियों के लिए भाग्यशाली 

रहने वाला है। 


ऐसे में आइये जानते हैं लकी राशिफल।


चंद्रमा का गोचर मिथुन राशि में होने वाला है। 
जबकि कल मंगलवार होने से मंगल ग्रह का प्रभाव पूरे दिन रहेगा। 
इस पर कल मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। 
इसके साथ ही कल गुरु और चंद्रमा के बीच युति होगी जिससे कल के दिन गजकेसरी योग का 
उत्तम संयोग बनेगा। 

यही नहीं कल के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बनने जा रहा है और मृगशिरा नक्षत्र के संयोग में वृद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। 

इस पर कल का दिन मंगलवार होने से हनुमान जी को समर्पित होगा। 
ऐसे में कल के दिन का महत्व और भी बढ़ जाएगा। 
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गजकेसरी योग का मूल निर्माण :


पारंपरिक ज्योतिष में गजकेसरी योग का प्रमुख आधार गुरु और चंद्रमा का संबंध है। 
सामान्यतः जब गुरु चंद्रमा से केंद्र स्थान—
अर्थात् 1, 4, 7 या 10वें स्थान—
में स्थित हो, तब गजकेसरी योग की स्थिति मानी जाती है।

उदाहरण के लिए यदि चंद्रमा मेष राशि में हो और गुरु मेष, कर्क, तुला या मकर से संबंधित केंद्र स्थिति में हो, तो गुरु - चंद्र संबंध के आधार पर गजकेसरी योग का विचार किया जाता है। 
लेकिन केवल यह गणना कर लेना पर्याप्त नहीं है। 
योग की वास्तविक शक्ति देखने के लिए गुरु की राशि, बल, दृष्टि, अस्त या वक्री स्थिति, पापग्रहों का प्रभाव, चंद्रमा की स्थिति, लग्न, भावेश और नवांश आदि का भी परीक्षण करना चाहिए।

उत्तम गजकेसरी योग तब अधिक प्रभावशाली माना जाता है जब गुरु बलवान हो, चंद्रमा शुभ एवं मजबूत हो, दोनों पर अत्यधिक पाप प्रभाव न हो और योग कुंडली के महत्वपूर्ण केंद्र या त्रिकोण भावों से शुभ रूप से जुड़ा हो।

वैदिक पंचांग के अनुसार, कल सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है। 
ऐसे में कल प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा जो भगवान शिव को समर्पित है। 
ऐसे में कल मंगलवार को गजकेसरी योग और हनुमानजी और महादेव की कृपा से कन्या सहित 5 राशियों को भाग्य का साथ मिलेगा। 

इसके साथ ही कल इन राशियों को करियर और कारोबार में मनचाही सफलता मिल सकती है। 
इनके परिवार में सुख समृद्धि बढ़ेगी। 
इसके साथ कल हनुमान चालीसा का पाठ करने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने का इन राशियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। 


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गुरु और चंद्रमा का आध्यात्मिक अर्थ :


गुरु ज्ञान, धर्म, सदाचार, शिक्षा, मार्गदर्शन, विस्तार, संतान, धन और आध्यात्मिक विवेक का प्रतिनिधि माना जाता है। 
चंद्रमा मन, भावना, कल्पना, स्मृति, माता, मानसिक शांति और लोकसंपर्क का कारक माना जाता है।

जब गुरु और चंद्रमा का शुभ संबंध बनता है तो परंपरागत ज्योतिष में इसे ज्ञान और मन के सुंदर समन्वय के रूप में देखा जाता है। 
केवल बुद्धि होना पर्याप्त नहीं है और केवल भावना होना भी पर्याप्त नहीं है। 
जब विवेक भावनाओं को दिशा देता है और मन ज्ञान को स्वीकार करता है, तब व्यक्ति जीवन में संतुलित निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर सकता है।

इसी कारण मजबूत गजकेसरी योग वाले जातक के संबंध में परंपरागत रूप से कहा जाता है कि उसमें शिक्षा, सलाह, नेतृत्व, समाज में सम्मान, धार्मिक या आध्यात्मिक रुचि और कठिन परिस्थितियों में मार्ग खोजने की क्षमता हो सकती है।

ऐसे में आइये विस्तार से जानते हैं कन्या सहित 5 राशियों के लिए किन किन मामलों में सौभाग्यशाली रहने वाला है। 

साथ ही जानिए कल मंगलवार के उपाय भी।

मेष राशि के जातकों के लिए मंगलवार का दिन मंगलकारी रहने वाला है। 

हनुमानजी की कृपा से आपके बल बुद्धि और विद्या में बढ़ोतरी होगी। 

आप साहसिक फैसले लेंगे जिससे अपने विरोधियों को चित करेंगे। 

कारोबार में छोटी दूरी की यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। 
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जन्मकुंडली में गजकेसरी योग का प्रभाव :


जन्मकुंडली में मजबूत गजकेसरी योग होने पर व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार के सकारात्मक परिणाम दिखाई दे सकते हैं। 

शिक्षा के क्षेत्र में सफलता, विद्या के प्रति रुचि, अच्छी स्मरणशक्ति, समझदारी और उचित समय पर उचित सलाह प्राप्त होना इसके पारंपरिक फल माने जाते हैं।

यदि यह योग धन एवं कर्म से संबंधित भावों से जुड़ा हो तो आर्थिक उन्नति, प्रतिष्ठित कार्य, व्यवसाय में विस्तार अथवा सम्मानजनक पद प्राप्त होने की संभावना बढ़ सकती है। 

दशा - अंतरदशा में गुरु या चंद्रमा सक्रिय होने पर योग के फल अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव किए जा सकते हैं।

यदि योग दशम भाव, दशमेश या कर्मक्षेत्र से शुभ रूप से जुड़ा हो तो व्यक्ति प्रशासन, शिक्षा, सलाह, अध्यापन, धर्म, न्याय, लेखन, प्रबंधन, वित्त, आध्यात्मिक कार्य या जनसंपर्क से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है।

यदि पंचम भाव से संबंध हो तो विद्या, बुद्धि, मंत्र - अध्ययन, संतान और रचनात्मक क्षमता के संदर्भ में शुभ परिणाम मिल सकते हैं। 

नवम भाव से संबंध होने पर धर्म, भाग्य, गुरु - कृपा, उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान की दिशा मजबूत हो सकती है।

यात्रा आपके लिए शुभ और सफल होगी। 

लेखन, मीडिया, कम्युनिकेशन, शोध, टीचिंग आदि के कार्यों से जुड़े जातकों के लिए कल का दिन विशेष रूप से लाभदायक रहने वाला है। 

कल आपको छोटे भाई बहनों का पूरा साथ मिलेगा जिससे आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। 

इसके साथ ही कल आपके परिवार में सुख शांति रहेगी। 

जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। 

वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा।

मेष राशि के लिए कल मंगलवार के उपाय : 

कल मंगलवार को हनुमानजी को चमेली के तेल वाला सिंदूर का चोला चढ़ाएं। 

इसके साथ ही कल 108 बार ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः मंत्र का जप करें।
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मिथुन राशि के लिए कैसा रहेगा :

मिथुन राशि के जातकों के लिए कल का दिन विशेष रूप से लाभदायक रहने वाला है। 
कल आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। 
आपके कार्य संपन्न होंगे और अटकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी। 
इसके साथ ही कल आप सुख सुविधाओं के ऊपर भी खर्च करेंगे। 
आपके मान सम्मान में बढ़ोतरी होगी। 
राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुडे़ जातकों के लिए कल का दिन उत्तम रहने वाला है। 
कल आपको पद और प्रतिष्ठा का लाभ मिल सकता है। 
इसके साथ ही आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा। 
आपकी सफलता को देखकर आपके प्रतिद्वंद्वी भी हैरान होंगे। 
वहीं परिवार में कल आनंद का माहौल रहेगा। 
अगर जीवनसाथी के साथ अनबन चल रही थी तो कल के दिन वह दूर हो जाएगी।

मिथुन राशि के लिए कल मंगलवार के उपाय : 


कल मंगलवार को हनुमानजी को लंगोट चढ़ाएं। 
इसके साथ ही लाल धोती पहनकर लाल आसन में बैठें और सुंदरकांड का पाठ करें। 
आपके मनोरथ सिद्ध होंगे।
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कन्या राशि के लिए कैसा है :

कन्या राशि के जातकों के लिए कल मंगलवार का दिन बेहद स्पेशल रहने वाला है। 
कल आपको कारोबार में मनचाही सफलता मिलने के आसार हैं। 
आपके कार्यों में तेजी आएगी। 
सरकारी सेवाओं से जुड़े जातकों के लिए कल का दिन विशेष रूप से लाभकारी रहने वाला है। 
कल आपको शासन और प्रशासन की तरफ से कार्यों में अपेक्षित सहयोग मिलने के आसार हैं। 
अगर आप ठेकेदारी आदि के काम से जुड़े हैं और सरकारी ठेका पाने के लिए प्रयास कर रहे थे तो कल के दिन आपकी इच्छा पूरी हो सकती है। 
नौकरीपेशा जातकों को कल नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। 
परिवार में आपके माहौल अनुकूल रहने वाला है। 
जीवनसाथी आपके कहे बिना आपकी बात को समझ जाएगा।

कन्या राशि के लिए कल मंगलवार के उपाय : 


कल मंगलवार को हनुमान जी को लाल झंडा चढ़ाएं। 
इसके साथ ही 108 बार ॐ रामदूताय नमः मंत्र का जप करें। 
रामभक्त हनुमान का आशीर्वाद मिलेगा।
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तुला राशि के लिए कैसा है:

तुला राशि के जातकों पर कल के दिन किस्मत मेहरबान रहने वाली है। 
कल आपका कहीं अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। 
जिससे आपके कार्य पूरे होंगे। 
इस के साथ ही आपके कार्य को पहचान मिलेगी। 
प्रभावशाली लोगों के साथ संपर्क हो सकता है जिससे कल के दिन आपको मुनाफे का सौदा मिल सकता है। 
विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में आ रहीं अड़चनें दूर होंगी। 
आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी और आपको कहीं से सम्मानित किया जा सकता है। 
परिवार में आपको पिता का स्नेह और सहयोग मिलेगा जिससे आपके आत्मबल में बढ़ोतरी होगी। 
कोई दिली इच्छा पूरी हो सकती है। 
वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी। 
जीवनसाथी के साथ घूमने जा सकते हैं।

तुला राशि के लिए कल मंगलवार के उपाय : 

कल मंगलवार को हनुमानजी को बूंदी का भोग लगाएं। 
इसके बाद संकटमोचक हनुमानाष्टक और बजरंग बाण का पाठ करें। 
इससे आपके संकट दूर होंगे।

कुंभ राशि के लिए कैसा होगा :

कुंभ राशि के जातकों के लिए कल मंगलवार का दिन उम्मीद से बढ़कर लाभदायक रहने वाला है। 
कल आपको कारोबार में इच्छित परिणामों की प्राप्ति हो सकती है। 
आपके पूर्व में किए गए प्रयास कल आपको अच्छा लाभ दिला सकते हैं। 
इसके साथ ही कल आपको अपने पुराने निवेश पर अच्छा रिटर्न हासिल करने का मौका मिल सकता है। 
कल फिल्म, कला, सिंगिंग, डांसिंग, डिजाइनिंग आदि का काम करने वालों को अलग पहचान मिल सकती है। 
इसके साथ ही कल आप किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। 
अपनी बुद्धिमत्ता से फैसले लेंगे जो आपको फायदा भी दिलाएंगे। 
परिवार में आपके सुख शांति रहेगी। 
जीवनसाथी से संबंध मधुर रहेंगे।

कुंभ राशि के लिए कल मंगलवार के उपाय : 


कल मंगलवार को हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली को पान का बीड़ा अर्पित करें। 
इसके साथ ही 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। 
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प्रश्नकुंडली में गजकेसरी योग :

प्रश्नकुंडली में व्यक्ति जिस समय कोई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछता है, उस समय के ग्रहों की स्थिति से प्रश्न का उत्तर निकालने की परंपरा है। 
यहाँ भी गुरु और चंद्रमा का संबंध महत्वपूर्ण हो सकता है।

यदि प्रश्नकुंडली में चंद्रमा बलवान हो और गुरु उससे केंद्र में शुभ स्थिति में हो तथा प्रश्न से संबंधित भाव और उसके स्वामी भी मजबूत हों, तो प्रश्न के समाधान की संभावना को शुभ माना जा सकता है।

उदाहरण के लिए नौकरी के प्रश्न में दशम भाव और दशमेश, विवाह के प्रश्न में सप्तम भाव और सप्तमेश, धन के प्रश्न में द्वितीय एवं एकादश भाव, संपत्ति के प्रश्न में चतुर्थ भाव तथा यात्रा के प्रश्न में संबंधित भावों का परीक्षण आवश्यक है।

इस लिए केवल प्रश्नकुंडली में गजकेसरी योग देखकर “कार्य निश्चित रूप से सफल होगा” कहना उचित नहीं है। 
योग को प्रश्न के विषय से जोड़कर देखना चाहिए।

गोचर में गजकेसरी जैसा शुभ संयोग :


गोचर में गुरु और चंद्रमा की स्थिति समय-समय पर शुभ संबंध बना सकती है। 
ऐसा संयोग अल्पकालिक होता है और जन्मकुंडली में स्थित स्थायी योग की तरह जीवनभर प्रभाव नहीं देता।

गोचर गुरु यदि जन्मचंद्रमा या लग्न से शुभ स्थान में हो और उसी समय चंद्रमा के साथ केंद्र संबंध बनाए, तो पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टि से ज्ञान, अवसर, सहायता, यात्रा, सामाजिक सम्मान या महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है।

लेकिन गोचर का फल हमेशा दशा और जन्मकुंडली से मिलाकर देखना चाहिए। 
यदि जन्मकुंडली में गुरु निर्बल हो, चंद्रमा पीड़ित हो या वर्तमान दशा प्रतिकूल हो, तो गोचर का शुभ प्रभाव सीमित हो सकता है। 
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कब गजकेसरी योग अत्यंत उत्तम माना जाए ?


उत्तम परिणाम के लिए निम्न बातों पर ध्यान दिया जाता है—

1. गुरु स्व या उच्च राशि में बलवान हो।
2. चंद्रमा शुभ, उज्ज्वल और पर्याप्त बलवान हो।
3. गुरु और चंद्रमा पर अत्यधिक पापग्रह प्रभाव न हो।
4. गुरु अस्त या अत्यधिक निर्बल अवस्था में न हो।
5. योग केंद्र या त्रिकोण भावों से शुभ रूप से संबंधित हो।
6. गुरु लग्न, पंचम, नवम, दशम या धन संबंधी भावों को शुभ दृष्टि दे।
7. नवांश में गुरु और चंद्रमा की स्थिति भी सहयोगी हो।
8. योग के समय गुरु या चंद्रमा की दशा-अंतरदशा सक्रिय हो तो फल अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
9. संबंधित भावों के स्वामी मजबूत हों।
10. व्यक्ति के कर्म और आचरण भी योग के सकारात्मक फल के अनुरूप हों।

गजकेसरी योग और धन :


गजकेसरी योग को केवल धन का योग मानना सही नहीं है। यह मूलतः ज्ञान, प्रतिष्ठा, विवेक और उन्नति से संबंधित शुभ संयोग के रूप में देखा जाता है। 
यदि इसके साथ द्वितीय, एकादश, नवम, दशम या धनकारक ग्रहों का मजबूत संबंध हो, तभी आर्थिक परिणाम अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

किसी जातक की कुंडली में गजकेसरी योग होने के बावजूद यदि धन भाव पीड़ित हों, द्वितीयेश और एकादशेश निर्बल हों या दशा प्रतिकूल हो, तो व्यक्ति को धन प्राप्ति में संघर्ष करना पड़ सकता है।
इस लिए “गजकेसरी योग = करोड़पति” जैसी धारणा ज्योतिषीय रूप से उचित नहीं है।

गजकेसरी योग के नियम :

इस योग का फल बताते समय सबसे बड़ा नियम है—
योग को अकेले नहीं देखना चाहिए।

पहले लग्न और लग्नेश को देखें। 
फिर चंद्रमा की स्थिति देखें। उसके बाद गुरु की राशि, भाव, दृष्टि और बल का विचार करें। 
इस के बाद संबंधित भावों के स्वामी, दशा-अंतरदशा, नवांश तथा वर्तमान गोचर को मिलाकर अंतिम निष्कर्ष निकालना चाहिए।

हस्तरेखा में गुरु पर्वत, चंद्र पर्वत, मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा को परंपरागत रूप से अलग संकेतों के रूप में देखा जाता है। 
इसी प्रकार अंकशास्त्र में जन्मांक और भाग्यांक का अध्ययन किया जा सकता है। 
परंतु इन सभी पद्धतियों को जन्मकुंडली के गजकेसरी योग का शाब्दिक विकल्प नहीं मानना चाहिए। 
प्रत्येक विद्या की अपनी पद्धति और सीमा है।  || ॐ नमः शिवाय  || 
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