*🌞🌹सूर्य ग्रह पीड़ा से मुक्ति के उपाय/सूर्य का हमारे जीवन पर प्रभाव🌹🌞*

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

*🌞🌹सूर्य ग्रह पीड़ा से मुक्ति के उपाय🌹🌞* 


सूर्य ग्रह पीड़ा से मुक्ति के उपाय/सूर्य का हमारे जीवन पर प्रभाव...!

सूर्य ग्रह पीड़ा से मुक्ति के उपाय :

आज हम जन्म पत्रिका अथवा गोचर के सूर्य के अशुभ प्रभाव को समाप्त कर उन को शुभ प्रभाव में बदलने के लिए कुछ विशेष उपाय लिख रहे हैं। 






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इनमें से कोई भी एक अथवा एक से अधिक उपाय आप निश्चिंत हो कर सकते हैं। 

उपाय शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से आरंभ करें।






1👉 प्रत्येक रविवार को गाय को गुड़ व गेहूं खिलाने से आर्थिक लाभ के साथ मान - सम्मान बढ़ता है।

2👉 रविवार को किसी भी मंदिर में तांबे का दीप अर्पित करने से कर्म क्षेत्र में बाधा नहीं आती जिसमें यह ध्यान रखें कि तांबे का दीपक मंदिर में ही छोड़ आए।

3👉 सरकारी नौकरी में यदि स्थानांतरण का भय हो तो सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल मिर्च के 21 दाने डालकर नित्य सूर्य को अर्घ्य देने एवं प्रार्थना करने से स्थानांतरण नहीं होता।

4👉 प्रतिदिन तांबे के लोटे में जल के साथ कच्चा दूध लाल पुष्प लाल चंदन मिलाकर अर्घ्य देने से सूर्य कृत कष्टों में कमी आती है एवं गुप्त शत्रु निष्क्रिय होते हैं।

5👉 पिता व पुत्र में यदि मानसिक विरोध हो तो पिता या पुत्र रविवार को सवा किलो गुड़ अपने सर से 11 बार उतार कर बहते जल में प्रवाहित करें इससे आपसी संबंध अच्छे होते हैं ऐसा लगातार 3 रविवार करें इसके अतिरिक्त यदि कोई सूर्य कृत रोग मुकदमेबाजी शत्रु समस्या अथवा कर्म क्षेत्र में विघ्न बाधा हो तो 2 किलो गुड़ प्रवाहित करना चाहिए।

6👉 यदि शत्रु कष्ट अधिक हो तो रविवार को लाल बैल को गुण एवं गेहूं खिलाना चाहिए।

7👉 सूर्य की प्रतिनिधि वस्तुओं का दान भूलकर भी नहीं लेना चाहिए।

8👉 घर में विष्णु पूजा अथवा हरिवंश पुराण की कथा करवानी चाहिए प्रतिदिन स्वयं भी इसका श्रवण मनन करना चाहिए।

9👉 सूर्य कृत कष्टों से मुक्ति के लिए सूर्य कवच स्तोत्र अथवा 108 नामों का उच्चारण करना चाहिए।

10👉 रविवार से आरंभ कर 40 दिन तक तांबे का सिक्का अथवा सिक्का रूपी तांबा जल में प्रवाहित करना चाहिए।

11👉 प्रथम भाव में सूर्य बस सप्तम भाव में शनि हो अथवा दोनों की युति हो तो बचपन में ही प्रताप की मृत्यु होने की संभावना अधिक होती है अधिक काम वेदना जीवन साथी का बीमार रहना अष्टम भाव में सूर्य से भी जीवनसाथी की मृत्यु होती है पंचम भाव में मंगल की राशि हो अथवा मंगल स्वयं हो वह साथ में सूर्य हो तो संतान कष्ट अथवा मृत्यु का भय रहता है ऐसे जातक को अपने पैतृक मकान में हैंड पंप लगवाना चाहिए रविवार के दिन मीठे शीतल जल की प्याऊ लगानी चाहिए।

12👉 सप्तम भाव में सूर्य व लग्न में शनि होने पर पुत्र नहीं होता होता भी है तो कुछ ना कुछ परेशानी व क्लेश अधिक रहता है रविवार को 4 × 4 इंच के सात तांबे के टुकड़े लेकर जातक भोजन के समय आचमन कर परोसी थाली में से थोड़ी - थोड़ी सभी सामग्री लेकर सभी सात टुकड़ो पर रखे इसके बाद निकाले हुए  भोजन को अग्नि को समर्पित कर तांबे के टुकड़े जमीन में गाड़ दें काली गाय को गेहूं की रोटी पर थोड़ा गेहूं का गुड रखकर खिलाएं।

13👉 धन भाव में सूर्य समस्या दे रहा हो तो भी बहते जल में गुड़ बहाएं।

14👉 पंचम भाव में सूर्य यदि कष्ट दे रहा हो तो प्रतिदिन सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य को प्रणाम करें तथा प्रातः एक तांबे के लोटे में जल में गुड शहद व शक्कर मिलाकर दिनभर थोड़ा थोड़ा पिये ऐसा लगातार 43 दिन तक करें।

15👉 अष्टम भाव के सूर्य के कारण यदि रोग कष्ट हो तो बंदर को गुड़ चने व चीटियों को शक्कर डालें।

16👉 पिता को यदि आपके अशुभ सूर्य से हानि हो रही हो अथवा कोई रोग हो तो आप किसी लाल बैल अथवा सांड वाले से संपर्क कर रविवार को बैल के गले में लाल धागा बंधवादे अगले रविवार को उस धागे को खुलवाकर दूसरा था का बंधवा दें तथा बैल का उतारा धागा पिता को पहना दे अगले रविवार को फिर यही करें तथा पिता का उतारा धागा विसर्जित कर दे ऐसा सात रविवार करें। 

अवश्य लाभ होगा।

17👉 नेत्र रोग अथवा चश्मा उतारने के लिए नित्य सूर्य को अर्घ्य दें। 

अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप करते रहें और अर्घ्य के समय यह ध्यान रखें कि जल धरती पर ना गिरे इसके लिए आप थाली अथवा गमले का उपयोग कर सकते हैं अर्घ्य देने के लिए दोनों हाथ इतनी ऊंचाई पर ले जाएं कि सूर्य की किरणें जल में से छनकर आप तक आए मन में यह सोचे कि सूर्य की किरणें आपके भ्रकुटी ( दोनों नेत्रों के बीच का स्थान ) से आपके अंदर प्रवेश कर रही है। 

रात में सोते समय सफेद सुरमा प्रयोग करें अगर कम नंबर का चश्मा है तो 6 माह और यदि अधिक नंबर का चश्मा है तो 1 वर्ष के अंदर चश्मा उतर जाएगा अनेक लोगों द्वारा अनुभूत है जिन्हें लाभ मिला है।

18👉 सूर्य के अधिक कष्ट देने की स्थिति में रविवार से अगले रविवार तक 800 + 800 ग्राम गुड़ व गेहूं मंदिर में दान करें।

19👉 किसी भी कार्य के लिए घर से निकलते समय सदैव गुड़ खाकर व पानी पीकर ही निकले।

20👉 आदित्य स्तोत्र, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य स्तोत्र, सूर्य स्तवन, सूर्याष्टक, सूर्य कवच, सूर्य मंत्र जाप, 108 नाम का पाठ नित्य करें।
*🌞ॐ भास्कराय नमः🌞*

सूर्य का हमारे जीवन पर प्रभाव और अन्य ग्रहों से युति का फल ( प्रथम भाग )

सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च :

यह जगतपिता है,इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है...!

यह आत्मा कारक और पितृ कारक है....!

पुत्र राज्य सम्मान पद भाई शक्ति दायीं आंख चिकित्सा पितरों की आत्मा शिव और राजनीति का कारक है....!

मेष राशि में उच्च का एवं तुला में नीच का ना जाता है...!

चन्द्रमा देव ग्रह है,तथा सूर्य का मित्र है....!

मंगल भी सूर्य का मित्र है...!

गुरु सूर्य का परम मित्र है....!

बुध सूर्य के आसपास रहता है....!

और सूर्य का मित्र है....!

शनि सूर्य पुत्र है लेकिन सूर्य का शत्रु है...!

कारण सूर्य आत्मा है और आत्मा का कोई कार्य नही होता है....!

जबकि शनि कर्म का कारक है...!

शुक्र का सूर्य के साथ संयोग नही हो पाता है...!

सूर्य गर्मी है और शुक्र रज है सूर्य की गर्मी से रज जल जाता है....!

और संतान होने की गुंजायस नही रहती है....!

इसी लिये सूर्य का शत्रु है...!

राहु विष्णु का विराट रूप है...!

जिसके अन्दर सम्पूर्ण विश्व खत्म हो रहा है...!

राहु सूर्य और चन्द्र दोनो का दुश्मन है...!

सूर्य के साथ होने पर पिता और पुत्र के बीच धुंआ पैदा कर देता है...!

और एक दूसरे को समझ नही पाने के कारण दोनो ही एक दूसरे से दूर हो जाते है...!

केतु सूर्य का सम है....!

और इसे किसी प्रकार की शत्रु या मित्र भावना नही है...!

सूर्य से सम्बन्धित व्यक्ति पिता चाचा पुत्र और ब्रहमा विष्णु महेश आदि को जाना जाता है....!

आत्मा राज्य यश पित्त दायीं आंख गुलाबी रंग और तेज का कारक है।

सूर्य और चन्द्र की युति/दृष्टि फल :

सूर्य और चन्द्रमा अगर किसी भाव में एक साथ होते है....!

तो कारकत्व के अनुसार फ़ल देते है....!

सूर्य पिता है और चन्द्र यात्रा है....!

पुत्र को भी यात्रा हो सकती है...!

एक संतान की उन्नति बाहर होती है।

सूर्य और मंगल की युति/दृष्टि फल :

मंगल के साथ एक साथ होने पर मंगल की गर्मी और पराक्रम के कारण अभिमान की मात्रा बढ जाती है....!

पिता प्रभावी और शक्ति मान बन जाता है....!

मन्गल भाई है,इसी लिये एक भाई सदा सहयोग मे रहता है....!

मन्गल रक्त है,इस लिये ही पिता पुत्र को रक्त वाली बीमारिया होती है....!

एक दूसरे से एक सात और एक बारह में भी यही प्रभाव होता है...!

स्त्री की कुन्डली में पति प्रभावी होता है....!

लेकिन उसके ह्रदय में प्रेम अधिक होता है।

सूर्य और बुध युति/दृष्टि फल :

बुध के साथ होने पर पिता और पुत्र दोनो ही शिक्षित होते है....!

समाज में प्रतिष्ठा होती है....!

जातक के अन्दर वासना अधिक होती है...!

पिता के पास भूमि भी होती है,और बहिन काफ़ी प्रतिष्ठित परिवार से सम्बन्ध रखती है....!

व्यापारिक कार्यों के अन्दर पिता पुत्र दोनो ही निपुण होते है....!

पिता का सम्बन्ध किसी महिला से होता है।

सूर्य और गुरु युति/दृष्टि फल :

गुरु के साथ होने पर जीवात्मा का संयोग होता है....!

जातक का विश्वास ईश्व्वर में अधिक होता है....!

जातक परिवार के किसी पूर्वज की आत्मा होती है....!

जातक के अन्दर परोपकार की भावना होती है....!

जातक के पास आभूषण आदि की अधिकता होती है....!

पद प्रतिष्ठा के अन्दर आदर मिलता रहता है।

सूर्य और शुक्र की युति/दृष्टि फल :

शुक्र के साथ होने पर मकान और धन की अधिकता होती है....!

दोनो की युति के चलते संतान की कमी होती है....!

स्त्री की कुन्डली में यह युति होने पर स्वास्थ्य की कमी मिलती है....!

शुक्र अस्त हो तो स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पडता है।

सूर्य और शनि की युति/दृष्टि फल :

शनि के साथ होने पर जातक या पिता के पास सरकार से सम्बन्धित कार्य होते है....!

पिता के जीवन में जातक के जन्म के समय काफ़ी परेशानी होती है,पिता के रहने तक पुत्र आलसी होता है....!

और पिता के बाद खुद जातक का पुत्र आलसी हो जाता है....!

पिता पुत्र के एक साथ रहने पर उन्नति नही होती है....!

वैदिक ज्योतिष में इसे पितृ दोष माना जाता है....!

जातक को गायत्री के जाप के बाद सफ़लता मिलने लगती है।

सूर्य और राहु की युति/दृष्टि फल :

सूर्य के साथ राहु का होना भी पितामह के बारे में प्रतिष्ठित होने की बात मालुम होती है....!

एक पुत्र की पैदायस अनैतिक रूप से भी मानी जाती है....!

जातक के पास कानून से विरुद्ध काम करने की इच्छायें चला करती है...!

पिता की मौत दुर्घटना में होती है....!

या किसी दवाई के रियेक्सन या शराब के कारण होती है....!

जातक के जन्म के समय पिता को चोट लगती है....!

जातक को सन्तान भी कठिनाई से मिलती है...!

पत्नी के अन्दर गुप चुप रूप से सन्तान को प्राप्त करने की लालसा रहती है...!

पिता के किसी भाई को जातक के जन्म के बाद मौत जैसी स्थिति होती है।

सूर्य और केतु की युति/दृष्टि फल :

केतु और सूर्य का साथ होने पर जातक और उसका पिता धार्मिक होता है....!

दोनो के कामों के अन्दर कठिनाई होती है....!

पिता के पास कुछ इस प्रकार की जमीन होती है....!

जहां पर खेती नही हो सकती है,नाना की लम्बाई अधिक होती है...!

और पिता के नकारात्मक प्रभाव के कारण जातक का अधिक जीवन नाना के पास ही गुजरता है।

सूर्य चन्द्र और मंगल की युति फल :

सूर्य चन्द्र और मंगल के एक साथ होने पर पिता के पास खेती होती है...!

और उसका काम बागवानी या कृषि से जुडा होता है...!

पिता का निवास स्थान बदला जाता है...!

जातक को रक्त विकार भी होता है...!

माता को पिता के भाई के द्वारा कठिनाई भी होती है....!

माता या सास को गुस्सा अधिक होता है....!

एक भाई पहले किसी कार्य से बाहर गया होता है।

सूर्य चन्द्र और बुध की युति/दृष्टि फल :

सूर्य चन्द्र बुध का साथ होने पर खेती वाले कामो की ओर इशारा करता है...!

पिता का सम्बन्ध किसी बाहरी महिला से होता है...!

एक पुत्र का मन देवी भक्ति में लगा रहता है....!

और वह अक्सर देवी यात्रा किया करता है...!

एक पुत्र की विदेश यात्रा भी होती है...!

पिता जब भी भूमि को बेचता या खरीदता है...!

तो उसे धोखा ही दिया जाता है।

सूर्य चन्द्र और गुरु की युति/दृष्टि फल :

सूर्य के साथ चन्द्र और गुरु के होने पर जातक का पिता यात्रा वाले कामो के अन्दर लगा रहता है...!

और अक्सर निवास स्थान का बदलाव हुआ करता है...!

जातक पिता का आज्ञाकारी होता है...!

और उसे बिना पिता की आज्ञा के किसी काम में मन नही लगता है...!

जातक का सम्मान विदेशी लोग करते है।

सूर्य चन्द्र और शुक्र की युति/दृष्टि फल :

सूर्य के साथ चन्द्र और शुक्र के होने से भी पिता का जीवन दो स्त्रियों के चक्कर में बरबाद होता रहता है...!

एक स्त्री के द्वारा वह छला जाता है....!

जातक की एक बहिन की शादी किसी अच्छे घर में होती है....!

पिता पुत्र के द्वारा कमाया गया धन एक बार जरूर नाश होता है...!

किसी प्रकार से छला जाता है...!

जातक की माता के नाम से धन होता है...!,

जमीन भी होती है....!

मकान भी होता है,मकान पानी के किनारे होता है...!

या फ़िर मकान में पानी के फ़व्वारे आदि होते है....!

जातक के अन्दर या पिता के अन्दर मधुमेह की बीमारी होती है।

सूर्य चन्द्र और शनि युति/दृष्टि फल :

सूर्य के साथ चन्द्र और शनि होने के कारण एक पुत्र की सेवा विदेश में होती है...!

पिता का कार्य यात्रा से जुडा होता है,सूर्य पिता है...! 

तो शनि कार्य और चन्द्र यात्रा से जुडा माना जाता है...!

शनि के कारण माता का स्वास्थ खराब रहता है...!

उसे ठंड या गठिया वाली बीमारिया होती है।

सूर्य चन्द्र और राहु युति दृष्टि फल :

सूर्य के साथ चन्द्र और राहु होने से पिता और पुत्र दोनो को ही टीवी देखने और कम्प्यूटर पर चित्रण करने का शौक होता है...!

फ़ोटोग्राफ़ी का शौक भी होता है...!

दादा काफ़ी विलासी रहे होते है,उनका जीवन शराब या लोगों की आफ़तों को समाप्त करने के अन्दर गया होता है...!

अथवा आयुर्वेद के इलाजो से उन्होने अपना समय ठीक बिताया होता है...!

एक पुत्र का अनिष्ट माना जाता है,चन्द्र गर्भ होता है....!

तो राहु मौत का नाम जाना जाता है...!

राहु चन्द्र मिलकर मुस्लिम महिला से भी लगाव रखते है...!

पिता का सम्बन्ध किसी विदेशी या मुस्लिम या विजातीय महिला से रहा होता है।

सूर्य चन्द्र और केतु की युति/दृष्टि फल :

सूर्य चन्द्र केतु के साथ होने पर पितामह एक वैदिक जानकार रहे होते है....!

नानी भी धार्मिक और वैदिक किताबों के पठन पाठन और प्रवचनो से जुडी होती है...!

माता को कफ़ की परेशानी होती है...!

जातक के पास खेती करने वाले या पानी से जुडे अथवा चांदी का काम करने वाले हथियार होते है....!

वह इन हथियारो की सहायता से इनका काम करना जानता है...!

चन्द्रमा खेती भी है और आयुर्वेद भी है एक पुत्र को आयुर्वेद या खेती का ज्ञान भी माना जाता है...!

शहरों मे इस काम को पानी के नलों को फ़िट करने वाला और मीटर की रीडिंग लेने वाले से भी जोडा जाता है....!

सरकारी पाइपलाइन या पानी की टंकी का काम भी इसी ग्रह युति मे जोडा जाता है।

शेष अगले भाग मे...!

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanatha Swami Covil Car parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits , V.O.C. nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 WHATSAPP नंबर : + 91 7598240825 ( तमिलनाडु )
Skype : astrologer85
Email: prabhurajyguru@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?/आध्यात्म एवं ज्योतिष में दशमी तिथि :

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?/आध्यात्म एवं ज्योतिष में दशमी तिथि : 

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?


श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। 

हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। 

कठिन इस लिए की इस में व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं |






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हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। 

विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। 

जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। 

ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता।

आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। 

जैसे - पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चीरते हुए.....! 

रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते...! 

हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी, राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए....!

हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगलते हुए हनुमानजी, बाल हनुमानजी, समुद्र लांगते हुए....! 

हनुमानजी, श्रीराम - हनुमानजी मिलन, सुरसा के मुंह से सूक्ष्म रूप में निकलते हुए...! 

हनुमानजी, पत्थर पर श्रीराम नाम लिखते हनुमानजी, लेटे हुए हनुमानजी, खड़े हनुमानजी, शिव पर जल अर्पित करते हनुमानजी, रामायण पढ़ते हुए हनुमानजी, अखाड़े में हनुमानजी शनि को पटकनी देते हुए....! 

ध्यान करते हनुमानजी, श्रीकृष्ण रथ के उपर बैठे हनुमानजी, गदा को कंधे पर रख एक घुटने पर बैठे हनुमानजी, पाताल में मकरध्वज और अहिरावण से लड़ते हनुमानजी, हिमालय पर हनुमानजी, दुर्गा माता के आगे हनुमानजी, तुलसीदासजी को आशीर्वाद देते हनुमानजी, अशोक वाटिका उजाड़ते हुए हनुमानजी, श्रीराम दरबार में नमस्कार मुद्रा में बैठे हनुमानजी आदि।

जिस घर में हनुमानजी का चित्र होता है वहां मंगल, शनि, पितृ और भूतादि का दोष नहीं रहता। 

हनुमानजी के भक्त हैं तो घर में हनुमानजी के चित्र कहां और किस प्रकार के लगाएं यह जानना जरूरी है। 

आओ आज हम आपको बताते हैं श्री हनुमानजी के चित्र लगाने के कुछ नियम...!

किस दिशा में लगाएं हनुमानजी का चित्र :

वास्तु के अनुसार हनुमानजी का चित्र हमेशा दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए लगाना चाहिए। 

यह चित्र बैठी मुद्रा में लाल रंग का होना चाहिए।

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हनुमानजी का चित्र इस लिए अधिक शुभ है....! 

क्योंकि हनुमानजी ने अपना प्रभाव सर्वाधिक इसी दिशा में दिखाया है।  

हनुमानजी का चित्र लगाने पर दक्षिण दिशा से आने वाली हर बुरी ताकत हनुमानजी का चित्र देखकर लौट जाती है। 

इससे घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है।

शयनकक्ष में न लगाएं हनुमान चित्र : 

शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और इसी वजह से उनका चित्र शयनकक्ष में न रखकर घर के मंदिर में या किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखना शुभ रहता है। 

शयनकक्ष में रखना अशुभ है।

भूत, प्रेत आदि से बचने हेतु : 

यदि आपको लगता है कि आपके घर पर नकारात्मक शक्तियों का असर है तो आप हनुमानजी का शक्ति प्रदर्शन की मुद्रा में चित्र लगाएं। 

आप चाहे तो पंचमुखी हनुमानजी का चित्र मुख्य द्वार के ऊपर लगा सकते हैं या ऐसी जगह लगाएं जहां से यह सभी को नजर आए। 

ऐसा करने से घर में किसी भी तरह की बुरी शक्ति प्रवेश नहीं करेगी।






पंचमुखी हनुमान:- 

वास्तुविज्ञान के अनुसार पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति जिस घर में होती है....! 

वहां उन्नति के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन संपत्ति में वृद्घि होती है।

जलस्रोत दोष : -

यदि भवन में गलत दिशा में कोई भी जल स्रोत हो तो इस वास्तु दोष के कारण परिवार में शत्रु बाधा, बीमारी व मन मुटाव देखने को मिलता है।  

इस दोष को दूर करने के लिए उस भवन में ऐसे पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाना चाहिए।

जिनका मुख  उस जल स्रोत की ओर देखते हुए दक्षिण पाश्चिम दिशा की तरफ हो।

बैठक रूप में : 

बैठक रूम में आप श्रीराम दरबार का फोटो लगाएं, जहां हनुमानजी प्रभु श्रीरामजी के चरणों में बैठे हुए हैं। 

इसके अलावा बैठक रूम में पंचमुखी हनुमानजी का चित्र, पर्वत उठाते हुए हनुमानजी का चित्र या श्रीराम भजन करते हुए हनुमानजी का चित्र लगा सकते हैं। 

ध्यान रखें कि उपरोक्त में से कोई एक चित्र लगा सकते हैं।

पर्वत उठाते हुए हनुमान का चित्र : 

यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपमें साहस, बल, विश्‍वास और जिम्मेदारी का विकास होगा।

आप किसी भी परिस्‍थिति से घबराएंगे नहीं। 

हर परिस्थिति आपके समक्ष आपको छोटी नजर आएगी और तुरंत ही उसका समाधान हो जाएगा।

उड़ते हुए हनुमान: 

यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपकी उन्नती, तरक्की और सफलता को कोई रोक नहीं सकता। 

आपमें आगे बढ़ने के प्रति उत्साह और साहस का संचार होगा। 

निरंतर आप सफलता के मार्ग पर बढ़ते जाएंगे |

श्रीराम भजन करते हुए हनुमान : 

यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपमें भक्ति और विश्‍वास का संचार होगा। 

यह भक्ति और विश्‍वास ही आपके जीवन की सफलता का आधार है।

आध्यात्म एवं ज्योतिष में दशमी तिथि का महत्त्व :

हिंदू पंचाग की दसवीं तिथि दशमी कहलाती है। 

इस तिथि का नाम धर्मिणी भी है क्योंकि इस तिथि में शुभ कार्य करने से शुभ फल प्राप्त होता है। 

इसे हिंदी में द्रव्यदा भी कहते हैं। 

यह तिथि चंद्रमा की दसवीं कला है, इस कला में अमृत का पान वायुदेव करते हैं। 

दशमी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 109 डिग्री से 120 डिग्री अंश तक होता है। 

वहीं कृष्ण पक्ष में दशमी तिथि का  निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 289 से 300 डिग्री अंश तक होता है। 

दशमी तिथि के स्वामी यमराज को माना गया है। 

आरोग्य और दीर्घायु प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को यमदेव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

दशमी तिथि का ज्योतिष में महत्त्व :

यदि दशमी तिथि शनिवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। 

इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। 

इसके अलावा दशमी तिथि गुरुवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। 

ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। 

बता दें कि दशमी तिथि पूर्णा तिथियों की श्रेणी में आती है, इस तिथि में किए गए कार्यों की कार्य पूर्ण होते हैं। 

वहीं किसी भी पक्ष की दशमी तिथि पर भगवान शिव का पूजन करना वर्जित माना जाता है। 

आश्विन महीने के दोनों पक्षों में पड़ने वाली दशमी तिथि शून्य कही गई है।

दशमी तिथि में जन्मे जातक को धर्म और अर्धम का ज्ञान भलीभांति होता है। 

उनमें देशभक्ति कूट कूटकर भरी होती है। 

ये लोग धार्मिक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। 

ये हमेशा जोश और उत्साह से भरे होते हैं। 

वे अपने विचार दूसरों के सामने प्रकट करने में संकोच नहीं करते हैं। 

ये लोग काम करने में हठी होते हैं लेकिन उदार भी बने रहते हैं। 

इन तिथि में जन्मे लोग आर्थिक रूप से संपन्न और दूसरों की भलाई करने में लगे रहते हैं। 

इन जातकों में कलात्मकता भी होती है। 

ये रंगमंच यानि थिएटर जैसी कला के प्रति जागरुक रहते हैं। 

ये लोग पारिवार को सदैव अपने साथ लेकर चलने वाले होते हैं। 

दशमी तिथि के शुभ कार्य :

दशमी तिथि में नए ग्रंथ का विमोचन, शपथग्रहण समारोह, उदघाटन करना आदि सम्बन्धित कार्य करने चाहिए। 

साथ ही इस तिथि में वाहन, वस्त्र खरीदना, यात्रा, विवाह, संगीत, विद्या व शिल्प आदि कार्य करना भी लाभप्रद रहता है। 

इसके अलावा किसी भी पक्ष की दशमी तिथि में उबटन लगाना और मांस, प्याज, मसूर की दाल खाना वर्जित है।

दशमी तिथि के प्रमुख हिन्दू त्यौहार एवं व्रत व उपवास :

विजयादशमी :

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा के पर्व मनाया जाता है। 

यह त्योहार अर्धम पर धर्म की विजय का प्रतीक है। 

इस दिन नए व्यापार, नए वाहन, आभूषण को खरीदना शुभ माना जाता है। 

गंगा दशहरा :

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। 

इस दिन गंगा नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। 

मान्यता है कि इस दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी।

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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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